नई दिल्ली। देश की आर्थिक स्थिति को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। हाल ही में जारी आर्थिक विकास दर के आंकड़ों के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। एक ओर बीजेपी सरकार की आर्थिक नीतियों को देश की मजबूती का आधार बता रही है, वहीं राहुल गांधी भविष्य में आर्थिक संकट की आशंका जता रहे हैं।
गृहमंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू आर्थिक सुधारों की सराहना करते हुए कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक चुनौतियों, महामारी और युद्ध जैसी परिस्थितियों के बावजूद भारत ने मजबूत प्रदर्शन किया है, जो सरकार की दूरदर्शी नीतियों का परिणाम है।
बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने भी आर्थिक आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि भारत की वार्षिक विकास दर 7.7 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उनका कहना है कि यह प्रदर्शन उन आशंकाओं को खारिज करता है, जिनमें देश की अर्थव्यवस्था को लेकर नकारात्मक तस्वीर पेश की जा रही थी।
जारी आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष के दौरान भारत की आर्थिक वृद्धि चारों तिमाहियों में मजबूत बनी रही। पहली तिमाही में 6.7 प्रतिशत, दूसरी में 8.4 प्रतिशत तथा तीसरी और चौथी तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। बीजेपी का दावा है कि यह स्थिरता भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है।
वैश्विक स्तर पर तुलना करें तो कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि दर भारत से काफी कम रही। जर्मनी, जापान, यूरो क्षेत्र और जी-7 देशों की औसत वृद्धि दर भारतीय आंकड़ों से पीछे रही। वहीं भारत का प्रदर्शन कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं से भी बेहतर बताया जा रहा है।
सरकार की आर्थिक नीतियों के समर्थक ऑटोमोबाइल बिक्री, विनिर्माण क्षेत्र में तेजी, लगातार बढ़ते जीएसटी संग्रह, बैंकिंग क्षेत्र में ऋण वितरण और मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार को अर्थव्यवस्था की सकारात्मक तस्वीर के संकेतक मान रहे हैं। उनका तर्क है कि ये आंकड़े निवेशकों और उपभोक्ताओं के बढ़ते विश्वास को दर्शाते हैं।
हालांकि विपक्ष का मानना है कि विकास दर के आंकड़ों के बावजूद रोजगार, महंगाई और आम लोगों की आर्थिक स्थिति जैसे मुद्दों पर सरकार को जवाब देना चाहिए। इसी को लेकर आर्थिक विकास और जमीनी हकीकत के बीच बहस लगातार जारी है।
फिलहाल अर्थव्यवस्था को लेकर सियासी बयानबाजी तेज है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावों के समर्थन में आंकड़ों का सहारा ले रहे हैं।








