जैतारण में अमराराम सैन को न्याय दिलाने की मांग तेज, कांग्रेस जिला अध्यक्ष किशोर चौधरी धरने में हुए शामिल

जैतारण में अमराराम सैन को न्याय दिलाने की मांग तेज, कांग्रेस जिला अध्यक्ष किशोर चौधरी धरने में हुए शामिल

जैतारण (पाली)। जैतारण शहर के बिजलीघर चौराहे पर हुए सड़क हादसे में मृतक अमराराम सैन को न्याय दिलाने की मांग को लेकर चल रहा धरना-प्रदर्शन मंगलवार को और तेज हो गया। आंदोलन को समर्थन देने के लिए ब्यावर जिला कांग्रेस अध्यक्ष किशोर चौधरी धरना स्थल पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात कर न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया। उन्होंने प्रशासन से मामले में शीघ्र, निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई की मांग की।

धरना स्थल पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए किशोर चौधरी ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और कहा कि पीड़ित परिवार को हर हाल में न्याय मिलना चाहिए। इसके बाद उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें मृतक के परिजनों को उचित आर्थिक मुआवजा देने, हादसे के लिए जिम्मेदार दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष एवं कड़ी कानूनी कार्रवाई करने तथा परिवार की सभी न्यायोचित मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की गई।

एसडीएम और डीवाईएसपी को सौंपा ज्ञापन

धरना स्थल से प्रतिनिधिमंडल ने उपखंड अधिकारी (एसडीएम) एवं पुलिस उपाधीक्षक (डीवाईएसपी) को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में प्रशासन से मामले की गंभीरता को देखते हुए संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करने और पीड़ित परिवार को जल्द न्याय दिलाने का आग्रह किया गया।

बिजलीघर चौराहे पर यातायात व्यवस्था सुधारने की मांग

धरने में मौजूद लोगों ने बताया कि बिजलीघर चौराहा शहर का सबसे व्यस्त यातायात क्षेत्र है, जहां भारी वाहनों की आवाजाही के कारण लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रभावी नियंत्रण लगाने, यातायात व्यवस्था को मजबूत करने तथा भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस और स्थायी कदम उठाने की मांग की।

डंपर की चपेट में आने से हुई थी मौत

गौरतलब है कि हाल ही में बिजलीघर चौराहे पर हुए सड़क हादसे में अमराराम सैन (55) की डंपर की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई थी। इस दर्दनाक हादसे के बाद से परिजन और स्थानीय नागरिक लगातार धरना-प्रदर्शन कर मृतक को न्याय दिलाने, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। आंदोलन को विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का भी समर्थन मिलना शुरू हो गया है।

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