बाड़मेर। बाड़मेर जिले के गिरल लिग्नाइट माइंस के खिलाफ चल रहे आंदोलन के दौरान एक मजदूर की मौत के बाद शुरू हुआ विवाद शुक्रवार शाम महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया। धरने पर बैठे मजदूर जैसाराम की तबीयत बिगड़ने से गुरुवार को मौत हो गई थी। इसके बाद शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी जिला अस्पताल की मॉर्च्युरी के बाहर धरने पर बैठ गए और सरकार व प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। विधायक ने कहा कि जब तक मृतक परिवार को न्याय नहीं मिलेगा और उनकी मांगों पर निर्णय नहीं होगा, तब तक धरना जारी रहेगा।
शुक्रवार शाम कैबिनेट मंत्री के.के. विश्नोई और चौहटन विधायक आदूराम मेघवाल की मध्यस्थता में प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और परिजनों के बीच वार्ता हुई। लंबी बातचीत के बाद मृतक जैसाराम के परिवार को 27 लाख रुपए का मुआवजा, उनकी पत्नी और दोनों बेटों को नौकरी तथा परिवार के लिए मकान बनवाने पर सहमति बनी। इसके अलावा शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने भी अपनी ओर से 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
दो महीने से जारी है आंदोलन
गिरल गांव में स्थानीय श्रमिक, किसान और युवा पिछले करीब दो महीने से माइंस प्रबंधन के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि खनन कंपनी ने स्थानीय लोगों को रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन अब स्थानीय युवाओं को नौकरी से हटाया जा रहा है और बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर 9 अप्रैल से धरना जारी है।
धरना स्थल पर बिगड़ी थी तबीयत
जानकारी के अनुसार गुरुवार रात धरना स्थल पर बैठे मजदूर जैसाराम की अचानक तबीयत बिगड़ गई। आंदोलनकारियों का आरोप है कि समय पर एम्बुलेंस और चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिलने से स्थिति गंभीर हो गई। पहले उन्हें भाडखा अस्पताल ले जाया गया और बाद में बाड़मेर जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मौत के बाद शव को जिला अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाया गया। सूचना मिलते ही परिजन, ग्रामीण और बड़ी संख्या में आंदोलनकारी अस्पताल पहुंच गए। इसके बाद विधायक रविंद्र सिंह भाटी भी मौके पर पहुंचे और परिजनों के साथ धरने पर बैठ गए।
विधायक भाटी ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि वे स्वयं पिछले एक महीने से धरना स्थल पर बैठे हुए हैं और कई बार प्रशासन को मजदूरों की समस्याओं से अवगत कराया गया, लेकिन किसी जिम्मेदार अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर बात तक नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की उदासीनता और लापरवाही के कारण एक गरीब मजदूर की जान चली गई।
भाटी ने कहा कि क्षेत्र के लोग पिछले 30 वर्षों से अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन के दौरान उनकी और कई मजदूरों की तबीयत पहले भी बिगड़ी थी, लेकिन तब डॉक्टर बुलाकर इलाज कराया गया था।
“यह राजनीति नहीं, सम्मान और रोजगार की लड़ाई”
विधायक ने कहा कि यह किसी राजनीतिक लाभ का मुद्दा नहीं बल्कि स्थानीय लोगों के सम्मान और रोजगार से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि मजदूरों की मांगें पूरी तरह जायज हैं और सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए थी।
भाटी ने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन स्थल पर पहले हथियार लहराने जैसी घटनाएं हुईं, लेकिन प्रशासन ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि जनता इस तरह की लापरवाही को कभी माफ नहीं करेगी।
प्रशासन ने शुरू की जांच
एडीएम राजेंद्र सिंह चांदावत ने बताया कि मजदूर की मौत के कारणों की जांच की जा रही है। प्रशासनिक टीम ने पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार करना शुरू कर दिया है और जांच पूरी होने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
क्या है पूरा विवाद
राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (RSMML) की गिरल लिग्नाइट माइंस क्षेत्र में कोयला खनन का कार्य करती है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि जमीन अधिग्रहण के समय स्थानीय लोगों को रोजगार देने के वादे किए गए थे, लेकिन बाद में उन वादों को पूरा नहीं किया गया।
आंदोलनकारी 8 घंटे की ड्यूटी व्यवस्था लागू करने, स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने और श्रमिकों के हितों की रक्षा करने की मांग कर रहे हैं। इसी को लेकर गिरल और आसपास के क्षेत्रों के लोग लगातार आंदोलन कर रहे हैं।
धरना खत्म होने की उम्मीद
शुक्रवार देर रात गिरल धरना स्थल पर एक बार फिर वार्ता का दौर शुरू होने की संभावना है। मृतक परिवार के लिए हुए समझौते के बाद अब प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच बाकी मांगों पर भी सहमति बनने की उम्मीद जताई जा रही है। यदि बातचीत सफल रहती है तो करीब दो महीने से चल रहा आंदोलन समाप्त हो सकता है।








