साध्वी प्रेम बाईसा की रहस्यमयी मौत, सोशल मीडिया पर जारी उनके सुसाइड नोट ने कई सवाल खड़े…? जांच में जुटी पुलिस

साध्वी प्रेम बाईसा की रहस्यमयी मौत, सोशल मीडिया पर जारी उनके सुसाइड नोट ने कई सवाल खड़े…? जांच में जुटी पुलिस

जोधपुर के पाल रोड क्षेत्र से जुड़ी 23 वर्षीय कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की बुधवार शाम संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। जानकारी के अनुसार साध्वी को उनके पिता वीरमनाथ और एक युवक कार से पाल रोड स्थित एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे थे। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। एसीपी (पश्चिम) छवि शर्मा ने बताया कि मौत के कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर होगा, फिलहाल हर एंगल से जांच जारी है।

निजी अस्पताल के डॉ. प्रवीण जैन ने बताया कि परिजनों के अनुसार साध्वी को बुखार था और इंजेक्शन लगाने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। अस्पताल लाए जाने तक शरीर में कोई हरकत नहीं थी। चिकित्सकों ने उन्हें रिवाइव करने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। देर रात करीब साढ़े 12 बजे पुलिस आश्रम के बाहर खड़ी एंबुलेंस से शव को अपने कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई के लिए ले गई। इस दौरान आश्रम के बाहर लोगों की भीड़ एकत्र रही।

Jodhpur Sadhvi Prembai Sa Suspicious Death; Instagram Post

इस मामले में नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी राज्य सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग की है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

घटना के लगभग चार घंटे बाद उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट से एक कथित सुसाइड पोस्ट सामने आने से मामला और भी रहस्यमय हो गया है। रात 9:28 बजे साध्वी के इंस्टाग्राम अकाउंट से एक पोस्ट साझा की गई, जिसमें लिखा था- मैं इस दुनिया से हमेशा के लिए अलविदा… मेरे जीते जी नहीं तो जाने के बाद तो न्याय मिलेगा। पुलिस इस पोस्ट की डिजिटल फॉरेंसिक जांच भी कर रही है।

बता दें कि साध्वी प्रेम बाईसा पिछले वर्ष एक पुराने वीडियो के वायरल होने के बाद सुर्खियों में आई थीं। वायरल क्लिप में उन्हें एक पुरुष के साथ गले मिलते हुए देखा गया था, जिसे सोशल मीडिया पर गलत अर्थों में प्रसारित किया गया। इस मामले को लेकर साध्वी ने बोरानाडा थाने में एफआईआर दर्ज करवाई थी और इसे एक साजिश करार दिया था। एक बातचीत में साध्वी ने स्पष्ट किया था कि वायरल वीडियो करीब तीन साल पुराना है, जब वे लंबे समय बाद अपने पिता से मिली थीं लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों ने इसे तोड़-मरोड़कर पेश किया और संत समाज को बदनाम करने का प्रयास किया था। उन्होंने ये आरोप भी लगाया था कि वीडियो वायरल करने से पहले उनसे 20 लाख रुपये की मांग की गई थी और जब उन्होंने पैसे देने से मना कर दिया तो आरोपियों ने वीडियो वायरल कर दिया।

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