पाली, 6 जून। पुनायता औद्योगिक क्षेत्र स्थित कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) संख्या-6 में मरम्मत और उन्नयन कार्य शुरू होने से शहर के औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन गतिविधियां प्रभावित हो गई हैं। प्लांट में टैंकों की सफाई और तकनीकी सुधार के चलते औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले रंगीन अपशिष्ट जल का संग्रहण अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।
सीईटीपी प्रबंधन के अनुसार प्लांट को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से यह कार्य शुरू किया गया है। अनुमान है कि रखरखाव और अपग्रेडेशन का यह अभियान चार से पांच दिनों तक चलेगा। इस अवधि में पुनायता, मंडिया रोड तथा औद्योगिक क्षेत्र के विभिन्न चरणों में संचालित करीब 450 रेड कैटेगरी इकाइयों के संचालन पर सीधा असर पड़ेगा। कई फैक्ट्रियों ने उत्पादन गतिविधियां सीमित कर दी हैं, जबकि अनेक इकाइयां पूरी तरह बंद रहीं।
प्रदूषण नियंत्रण पर प्रशासन की सख्ती
औद्योगिक अपशिष्ट के कारण बांडी, जोजरी और लूणी नदी में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए प्रशासन ने हाल ही में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। यह टीम औद्योगिक इकाइयों और ट्रीटमेंट सिस्टम की कार्यप्रणाली पर निगरानी रखेगी तथा प्रदूषण फैलाने वाले मामलों की जांच करेगी।
पहले भी उठते रहे हैं सवाल
पिछले वर्षों में कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें औद्योगिक अपशिष्ट को अवैध माध्यमों से नदियों और नालों में छोड़े जाने के आरोप लगे। कुछ मामलों में गुप्त पाइपलाइन और टैंकरों के जरिए रात के समय प्रदूषित पानी बहाने की शिकायतों पर कार्रवाई भी हुई थी। इन घटनाओं ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा की थीं।
जवाबदेही तय करने पर जोर
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि नई एसआईटी केवल प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर ही नजर नहीं रखेगी, बल्कि निगरानी व्यवस्था में किसी प्रकार की लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा करेगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित पक्षों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।








