लोकसभा में हुआ राजनाथ-शाह बनाम राहुल; क्या है वह किताब, जिसे लेकर लोकसभा में हुई जबरदस्त बहस?

लोकसभा में हुआ राजनाथ-शाह बनाम राहुल; क्या है वह किताब, जिसे लेकर लोकसभा में हुई जबरदस्त बहस?

संसद में जोरदार हंगामे के बाद लोकसभा की कार्यवाही को मंगलवार (3 फरवरी 2026) सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दिया गया. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सदन के बाहर आकर कहा कि उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने दावा किया, ‘सरकार ने किताब नहीं छापने दी. पूर्व आर्मी चीफ अपनी बात बताना चाह रहे थे. मोदी सरकार सच छिपा रही है.’ उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि संसद में सरकार उन्हें बोलने नहीं दे रही है

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हो रही चर्चा के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बोलने के लिए खड़े हुए। उन्होंने कुछ कागजों के जरिए 2020 के गलवां संघर्ष का जिक्र करते हुए अपना भाषण शुरू किया। इस दौरान सत्ता पक्ष ने उनके भाषण पर आपत्ति जताई। असल में राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत में कहा कि वे पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब के कुछ अंशों के जरिए चीन से संघर्ष के बारे में बताना चाहते हैं। हालांकि, इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि जो किताब प्रकाशित ही नहीं हुई है, राहुल गांधी उसका जिक्र सदन में कैसे कर सकते हैं? वे इसके सत्यापन के लिए क्या सबूत देंगे?

इसके बाद लोकसभा में नियमों और कायदों को लेकर बहस छिड़ गई और सदन की कार्यवाही 3 बजे तक के लिए स्थगित दी गई। 3 बजे जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो भी हंगामा जारी रहा। इसके बाद सदन की कार्यवाही को चार बजे तक स्थगित कर दिया गया। आखिरकार चार बजे भी जब मुद्दे की चर्चा पर हल नहीं निकल सका, तो सदन को 3 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

क्या है वह किताब…?

जिस किताब को लेकर लोकसभा में सत्तापक्ष के नेता और विपक्ष के नेता आमने-सामने आ गए, वह भारत के पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की आत्मकथा- ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ है। इस किताब का प्रकाशन पेंगुइन रैंडम हाउस की ओर से किया जाना था और जनरल नरवणे ने इसमें भारत-चीन के बीच जून 2020 से शुरू हुए तनाव और इसके पूरे घटनाक्रम का जिक्र किया है। समाचार एजेंसी पीटीआई ने दिसंबर 2023 में इस किताब के प्रकाशन के लिए तय तारीख से कुछ समय पहले ही इसके अंशों का जिक्र किया था।

हालांकि, कुछ दिन बाद ही यह सामने आया कि भारतीय सेना प्रकाशन से पहले इस किताब की समीक्षा कर रही है। दरअसल, किसी भी सैन्य अधिकारी/कर्मी/सेना के मामलों से जुड़ी किसी भी किताब या दस्तावेज के प्रकाशन से पहले सेना की मंजूरी अनिवार्य है।

किताब में किन बातों का हुआ है खुलासा?

न्यूज एजेंसी पीटीआई ने जनरल नरवणे की किताब के जिन अंशों को प्रकाशित किया था, उनमें पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर रेचिन ला पर्वत दर्रे पर चीन की सेना और टैंकों का जिक्र था। इन अंशों में बताया गया कि जब चीन की ओर से यह नापाक हरकत की जा रही थी, उस दौरान एमएम नरवणे ने चीन-भारत की सेना के बीच हुई तनाव की स्थिति पर रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और रक्षा कर्मचारियों के प्रमुख से बातचीत की थी।

इन प्रकाशित अंशों में जनरल नरवणे के हवाले से लिखा गया था कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ फोन पर बातचीत के बाद दिमाग में कई अलग-अलग विचार दौड़ रहे थे। नरवणे ने लिखा कि मैंने रक्षा मंत्री को स्थिति की गंभीरता की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने कहा कि उस दौरान पीएम से भी बात की थी। उन्होंने कहा था कि यह पूरी तरह से एक सैन्य निर्णय है, ‘जो उचित समझो वो करो’।

साथ ही उन्होंने कहा कि मुझे अपनी इच्छानुसार कार्य करने की पूर्ण स्वतंत्रता के साथ एक कड़ा फैसला लेने की जिम्मेदारी दी गई थी। उस दिन को याद करते हुए उन्होंने लिखा कि इसके बाद मैंने एक गहरी सांस ली और कुछ मिनटों के लिए चुपचाप बैठा रहा। दीवार घड़ी की टिक-टिक को छोड़कर सब कुछ शांत था।

उन्होंने लिखा कि मैं आर्मी हाउस में था, एक दीवार पर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का नक्शा था, दूसरी दीवार पर पूर्वी कमान का। वे अचिह्नित नक्शे थे, लेकिन जैसे ही मैंने उन्हें देखा, मैं प्रत्येक इकाई के स्थान की कल्पना कर सकता था। हम हर तरह से तैयार थे, लेकिन क्या मैं वास्तव में युद्ध शुरू करना चाहता था? ये सवाल मन में था। बता दें ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ में जनरल नरवणे उस रात की घटना को लेकर मन में आए विचारों का जिक्र किया।

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