केशर सिंह, सम्पादक – सांचल डेस्कटॉप / देश आज जिस दौर से गुजर रहा है, वहां आम आदमी की जिंदगी धीरे-धीरे संघर्ष में बदलती जा रही है। कभी पेट्रोल-डीजल के दाम जनता की कमर तोड़ रहे हैं, तो कभी बिजली, गैस और रोजमर्रा की चीजों की महंगाई लोगों की जेब खाली कर रही है। दूसरी तरफ बेरोजगारी का ऐसा संकट खड़ा हो चुका है कि पढ़े-लिखे युवा डिग्रियां लेकर सड़कों पर घूम रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर देश का आम नागरिक कब तक केवल भाषण सुनेगा और कब उसे राहत मिलेगी?
बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दाम, बेरोजगारी और महंगाई के बीच आखिर कब जागेगी सरकार?




