साध्वी प्रेम बाईसा को पैतृक गांव परेऊ में दी भू-समाधि, जीवन भर संघर्ष और अब सवालों में मौत, आश्रम में बनी समाधि

साध्वी प्रेम बाईसा को पैतृक गांव परेऊ में दी भू-समाधि, जीवन भर संघर्ष और अब सवालों में मौत, आश्रम में बनी समाधि

राजस्थान में अपने भजनों से सुरीली आवाज के लिए घर-घर में छाई साध्वी प्रेम बाईसा की 28 जनवरी को संदिग्ध हालातों में मौत हो गई. आज शुक्रवार, 30 जनवरी को उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव बालोतरा के परेऊ गांव में हुआ. लेकिन उनका अंतिम संस्कार साधु संतों की परंपरा के अनुसार किया गया. उनका दाह संस्कार नहीं किया गया बल्कि समाधि दी गई. इस दौरान बड़ी संख्या में साधु-संत मौजूद रहे और पूरे विधि-विधान के साथ साध्वी को समाधि देने की रस्म पूरी की गई. उनकी समाधि के आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में उनके अनुयायी भी मौजूद रहे. पूरा माहौल शोक के साथ भक्तिमय बना रहा. साध्वी के पार्थिव शरीर के आश्रम पहुंचने के बाद रात भर वहां भजन होता रहा

Sadhvi Prem Baisa  bhoo samadhi

चर्चित कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा का जीवन भक्ति, संघर्ष और आध्यात्मिक साधना से होकर गुजरा। बालोतरा जिले के परेऊ गांव में जन्मीं प्रेम बाईसा ने साधारण परिवार की बेटी से प्रदेशभर में श्रद्धा और भक्ति का केंद्र बनने तक का प्रेरणादायक सफर तय किया। चार-पांच साल की उम्र में ही प्रेम बाईसा माता-पिता की भक्ति और कठोर तपस्या से प्रेरित होकर भक्ति-भाव में लीन हो गईं। छोटे उम्र में ही उन्होंने भजन सुनना और साधु-संतों के बीच बैठकर धार्मिक शिक्षा लेना शुरू कर दिया।

Latest and Breaking News on NDTV

उनकी वाणी, स्मरण शक्ति और कथा कहने की शैली ने कम उम्र में ही लोगों को प्रभावित किया। केवल 12 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने जोधपुर के पास अपनी पहली सार्वजनिक कथा आयोजित की। इसके बाद धीरे-धीरे उनकी ख्याति बढ़ी और वे राजस्थान की चर्चित कथावाचकों में गिनी जाने लगीं। उनका निधन, हालांकि, रहस्यों और सवालों से घिरा हुआ है।

साध्वी प्रेम बाईसा के गांव में आश्रम के बाहर अंतिम दर्शन के लिए जुटे लोग

बुधवार शाम जोधपुर के एक निजी अस्पताल में साध्वी प्रेम बाईसा का निधन हो गया। मृत्यु के करीब चार घंटे बाद कथित सुसाइड नोट सामने आने से मामला और पेचीदा बन गया। परिजनों का दावा है कि गलत इंजेक्शन लगाए जाने के कारण उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी थी। सुसाइड नोट ने भी मौत के कारणों पर कई सवाल खड़े कर दिए। पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।

पोस्टमार्टम के बाद साध्वी के शव को उनके परिजनों को सौंप दिया गया. इसके बाद कल देर शाम एंबुलेंस से उनके शव को जोधपुर से बालोतरा में उनके पैतृक गांव परेऊ लाया गया. शव को परेऊ गांव में उनके आश्रम लाया गया जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण जुटे. वहां उनके शव को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया. उनके पार्थिव शव के पास रात भर ग्रामीणों ने भजन गाए.

हालांकि साध्वी की मौत के बाद उनके और उनके परिवार के व्यक्तिगत जीवन को लेकर गांव के लोगों ने चुप्पी साधी हुई है. उनकी मौत पर हर शख्स स्तब्ध नजर आया

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *