एक महीने तक चली मेंबरशिप और वोटिंग प्रक्रिया खत्म, लाखों युवाओं ने दिखाया उत्साह
यूथ कांग्रेस के राजस्थान संगठन चुनाव को लेकर पिछले करीब एक महीने से चल रही प्रक्रिया बुधवार शाम थम गई। प्रदेश अध्यक्ष से लेकर जिला स्तरीय कार्यकारिणी के गठन के लिए चल रहे इस चुनाव में युवाओं ने बड़ी संख्या में भागीदारी निभाई।
21 मार्च से शुरू हुई नामांकन प्रक्रिया के बाद 21 अप्रैल से सदस्यता अभियान और वोटिंग का दौर शुरू हुआ था, जो अब निर्धारित समय के साथ पूरा हो गया है। इस पूरी प्रक्रिया के जरिए यूथ कांग्रेस से जुड़े सदस्यों ने अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को वोट दिया।
34 लाख से ज्यादा सदस्य जुड़े
इस चुनावी प्रक्रिया के दौरान राजस्थान में बड़ी संख्या में युवाओं ने यूथ कांग्रेस की सदस्यता ली। आंकड़ों के अनुसार 34 लाख से अधिक लोगों का पंजीकरण हुआ। हालांकि इनमें से करीब 29 लाख सदस्यों ने ही निर्धारित सदस्यता शुल्क जमा कराया है।
जिन सदस्यों ने अभी तक फीस जमा नहीं करवाई है, उन्हें अंतिम अवसर दिया गया है, लेकिन अब नए सदस्य नहीं जोड़े जाएंगे।

करोड़ों की सदस्यता राशि जमा
इस बार यूथ कांग्रेस की सदस्यता फीस 75 रुपये तय की गई थी। इसी के आधार पर संगठन को करोड़ों रुपये की राशि प्राप्त हुई है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि सदस्यता अभियान ने संगठनात्मक स्तर पर भी बड़ा असर दिखाया है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बड़ी संख्या में युवाओं का जुड़ना इस बात का संकेत है कि युवा राजनीति में सक्रिय भागीदारी निभाना चाहते हैं।
प्रदेश अध्यक्ष की रेस हुई रोचक
राजस्थान यूथ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर मुकाबला काफी दिलचस्प माना जा रहा है। शुरुआत में यह सीधी टक्कर मानी जा रही थी, लेकिन बाद में तीसरे दावेदार की सक्रियता से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया।
अब संगठन के भीतर यह चर्चा तेज है कि आखिर प्रदेश यूथ कांग्रेस की कमान किसके हाथ जाएगी।
दिल्ली में होगा अंतिम फैसला
सूत्रों के अनुसार सबसे ज्यादा समर्थन हासिल करने वाले प्रमुख उम्मीदवारों को अब दिल्ली बुलाया जाएगा। वहां इंटरव्यू और संगठनात्मक प्रक्रिया के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
इसके बाद राजस्थान यूथ कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष की औपचारिक घोषणा की जाएगी।
युवा राजनीति पर टिकी नजरें
राजस्थान में आने वाले समय में विधानसभा और लोकसभा राजनीति को देखते हुए यूथ कांग्रेस का यह चुनाव काफी अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जो भी नेता प्रदेश अध्यक्ष बनेगा, उसकी भूमिका आने वाले चुनावों में संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण रहेगी।
अब कांग्रेस कार्यकर्ताओं और युवाओं की नजर अंतिम फैसले पर टिकी हुई है कि आखिर प्रदेश की युवा राजनीति की कमान किसे सौंपी जाएगी।




