प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुवाहाटी में शहीद स्मारक पर असम आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि, ब्रह्मपुत्र नदी में क्रूज पर ‘परीक्षा पे चर्चा’ के तहत छात्रों से संवाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुवाहाटी में शहीद स्मारक पर असम आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि, ब्रह्मपुत्र नदी में क्रूज पर ‘परीक्षा पे चर्चा’ के तहत छात्रों से संवाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार (21 दिसंबर 2025) को असम की राजधानी गुवाहाटी पहुंचे, जहां उन्होंने अपने दौरे की शुरुआत पश्चिम बोरागांव स्थित स्वहीद स्मारक क्षेत्र से की. यहां उन्होंने असम आंदोलन के दौरान शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके बलिदान को नमन किया. प्रधानमंत्री ने कहा कि इन शहीदों का संघर्ष असम की पहचान और अधिकारों की रक्षा का प्रतीक है.

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ANI के मुताबिक गुवाहाटी दौरे पर परीक्षा पर चर्च कार्यक्रम में भाग लेंगे, जिसमें प्रधानमंत्री ने असम के 25 प्रतिभाशाली छात्रों से बात करेंगे. यह बातचीत ब्रह्मपुत्र नदी में चल रहे एक क्रूज पर आयोजित की जाएगी. पीएम मोदी पढ़ाई के तनाव, भविष्य की तैयारी और आत्मविश्वास जैसे विषयों पर छात्रों से सीधे संवाद करेंगे. नदी के बीच होने वाली ये चर्चा छात्रों के लिए खास रहने वाला है

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दिन के दूसरे हिस्से में प्रधानमंत्री मोदी डिब्रूगढ़ जिले के नामरूप पहुंचे, जहां वह एक बड़े उर्वरक संयंत्र की आधारशिला रखेंगे. यह संयंत्र 12.7 लाख मीट्रिक टन सालाना उत्पादन क्षमता वाला होगा. सरकार का मानना है कि इस परियोजना से न केवल उर्वरक उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि किसानों को समय पर खाद उपलब्ध होगी और पूर्वोत्तर भारत में कृषि विकास को नई गति मिलेगी. इससे पहले शनिवार को प्रधानमंत्री ने गुवाहाटी के लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया था. नए टर्मिनल परिसर के प्रवेश द्वार पर भारत रत्न गोपीनाथ बोरदोलोई की प्रतिमा का अनावरण कर उन्होंने असम के पहले मुख्यमंत्री को श्रद्धांजलि भी दी.

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असम की विकास यात्रा

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि असम और पूरा पूर्वोत्तर भारत अब देश के विकास का नया प्रवेश द्वार बन रहा है. उन्होंने जोर देकर कहा कि आधुनिक एयरपोर्ट, बेहतर सड़कें और मजबूत कनेक्टिविटी इस क्षेत्र में नए अवसर पैदा कर रही हैं. पीएम मोदी के अनुसार, जब लोग असम में बड़े हाईवे और आधुनिक बुनियादी ढांचे को देखते हैं, तो उन्हें महसूस होता है कि राज्य को अब सही मायनों में न्याय मिल रहा है. प्रधानमंत्री ने असम की जनता, खासकर माताओं और बहनों के स्नेह और समर्थन को अपनी ऊर्जा का स्रोत बताया और कहा कि असम के विकास की यात्रा में एक और नया अध्याय जुड़ चुका है.

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