पाली, 27 अप्रैल। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार वर्ष 2026 की दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन 09 मई को किया जायेगा।
सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अपर जिला न्यायाधीश विक्रम सिंह भाटी ने बताया कि प्री-लिटिगेशन के सन्दर्भ में यह राष्ट्रीय लोक अदालत धारा 138 परक्राम्य विलेख अधिनियम, धन वसूली के प्रकरण, बिजली, पानी एवं अन्य बिल भुगतान से संबंधित प्रकरण और लम्बित प्रकरणों के सन्दर्भ में राजीनामा योग्य फौजदारी प्रकरण, अंतर्गत धारा 138 परक्राम्य विलेख अधिनियम, धन वसूली मामले, एम.ए.सी.टी. मामले, बिजली, पानी एवं अन्य बिल भुगतान से संबंधित प्रकरण (अशमनीय के अलावा), वैवाहिक विवाद (तलाक को छोडकर), भूमि अधिग्रहण से संबंधित प्रकरण, सिविल मामले एवं अन्य राजीनामा योग्य मामलों के संबंध में आयोजित की जावेगी। बैंक एवं वित्तीय संस्थाओं द्वारा प्राप्त प्रकरणों में प्री-काउंसलिंग के माध्यम से भी लोक अदालत से पूर्व प्रकरणों मे राजीनामा करवाने के प्रयास किये जायेंगे तथा जिला मुख्यालय एवं तालुका स्तर पर राष्ट्रीय लोक अदालत से पूर्व प्री-काउंसलिंग के माध्यम से राजीनामा करवाने के प्रयास भी किये जायेंगे एवं आमजन मे लोक अदालत के प्रति जागरुकता एवं लोक अदालत के फायदो से भी अवगत करवाया जायेगा।
सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अपर जिला न्यायाधीश विक्रम सिंह भाटी की अध्यक्षता में पाली मुख्यालय के बैंको एवं वित्तीय संस्थानों व राजकीय विभागों के अधिकारियों के साथ सोमवार को बैठक का आयोजन किया गया। राजस्व प्रकरणों के क्रम में सीमाज्ञान, पैमाईश, नामान्तरण, शुद्धि प्रकरण आदि विभिन्न प्रकृति के प्रकरणों को लोक अदालत मे रेफर करने एवं प्री-काउंसलिंग के माध्यम से पक्षकारान में राजीनामा के माध्यम से निस्तारण तथा बैंक एवं वित्तीय संस्थानों से उपस्थित अधिकारीगण को निर्देश दिये कि ऋण/बकाया बिलों की वसूली प्रकरणों का लोक अदालत में अधिक संख्या में निस्तारण होता है। अतः ऋण/बकाया बिलों के प्री-लिटिगेशन प्रकरण समय रहते प्रस्तुत करें ताकि पक्षकारान को समय पर नोटिस जारी किया जा सके एवं राजीनामा के समुचित प्रयास किये जा सकें।
बैठक मे बैंक ऑफ बड़ौदा से अशोक कुमार, श्रम विभाग से दिनेश सारण एवं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से तेजेन्द्र पाल सिंह, आईडीबीआई बैंक से पोशाक कुमार सहित अन्य बैंक-वित्तीय संस्थाओं तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहें।







