बाड़मेर में आंदोलन के दौरान हाईवोल्टेज ड्रामा: मजदूरों की मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने खुद पर छिड़का पेट्रोल, कलेक्ट्रेट परिसर में मचा हड़कंप

बाड़मेर में आंदोलन के दौरान हाईवोल्टेज ड्रामा: मजदूरों की मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने खुद पर छिड़का पेट्रोल, कलेक्ट्रेट परिसर में मचा हड़कंप

बाड़मेर में मंगलवार को मजदूर आंदोलन के दौरान बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने विरोध प्रदर्शन के बीच खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया, जिसके बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। समर्थकों ने तुरंत कपड़ों से पेट्रोल साफ किया, जबकि पुलिसकर्मियों ने विधायक और उनके समर्थकों को घेरकर कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर पहुंचाया।

बताया जा रहा है कि विधायक भाटी अपने साथ बैग में पेट्रोल की बोतल लेकर पहुंचे थे। जैसे ही पुलिस ने उनके समर्थकों को रोकने और हटाने की कोशिश की, विधायक ने बैग से बोतल निकालकर अपने ऊपर पेट्रोल डाल लिया। घटना के बाद वहां मौजूद पुलिस अधिकारी तुरंत सक्रिय हुए और विधायक को सुरक्षा घेरे में लेकर अंदर ले जाया गया।

कलेक्ट्रेट के भीतर जिला कलेक्टर चिन्मयी गोपाल और एसपी चुनाराम जाट ने विधायक भाटी से बातचीत की। वहीं बाहर बड़ी संख्या में समर्थक नारेबाजी करते रहे। पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया और इलाके में भारी पुलिस जाप्ता तैनात कर दिया गया।

500 गाड़ियों के काफिले के साथ निकले थे विधायक

जानकारी के अनुसार गिरल लिग्नाइट माइंस से जुड़े मजदूरों और स्थानीय युवाओं की मांगों को लेकर विधायक रविंद्र सिंह भाटी मंगलवार दोपहर करीब 500 गाड़ियों के काफिले के साथ गिरल गांव से कलेक्ट्रेट की ओर रवाना हुए थे।

लेकिन कलेक्ट्रेट पहुंचने से पहले ही पुलिस ने बसें और बैरिकेड लगाकर काफिले को रोक दिया। इसके बाद विधायक और समर्थक पैदल ही आगे बढ़ने लगे। जैसे-जैसे भीड़ कलेक्ट्रेट के करीब पहुंची, माहौल तनावपूर्ण होता गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पुलिस और समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। इसी दौरान विधायक भाटी ने अचानक पेट्रोल की बोतल निकालकर खुद पर छिड़क ली। घटना के बाद कुछ समय के लिए वहां भगदड़ जैसे हालात बन गए।

क्या हैं आंदोलनकारियों की मांगें?

दरअसल बाड़मेर जिले के गिरल क्षेत्र में स्थित लिग्नाइट माइंस को लेकर पिछले 39 दिनों से स्थानीय मजदूर, ड्राइवर और ग्रामीण आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (RSMML) ने स्थानीय युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन अब उन्हें नौकरी से हटाया जा रहा है।

ग्रामीणों और मजदूरों की मुख्य मांग है कि:

स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता दी जाए
8 घंटे की ड्यूटी व्यवस्था लागू की जाए
बाहर से लाए जा रहे कर्मचारियों पर रोक लगे
स्थानीय युवाओं को स्थायी रोजगार मिले

इन्हीं मांगों को लेकर किसान और युवा 9 अप्रैल से गिरल गांव में धरने पर बैठे हुए हैं।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद बढ़ा तनाव

इस पूरे मामले में एक दिन पहले हाईकोर्ट ने भी अहम निर्देश दिए थे। कोर्ट ने गिरल माइंस से लिग्नाइट परिवहन कार्य जारी रखने और वाहनों को सुरक्षा उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे। साथ ही रास्ता रोकने या बाधा उत्पन्न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने को भी कहा गया था।

इसके बाद मंगलवार का आंदोलन और ज्यादा संवेदनशील हो गया। प्रशासन पहले से ही अलर्ट पर था और कलेक्ट्रेट के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।

क्या है RSMML और गिरल माइंस?

RSMML राजस्थान सरकार का सार्वजनिक उपक्रम (PSU) है, जो राज्य में रॉक फॉस्फेट, लिग्नाइट, जिप्सम और लाइमस्टोन का खनन करता है। बाड़मेर जिले के गिरल और थुंबली गांव क्षेत्र में स्थित लिग्नाइट माइंस राजस्थान की पहली आधुनिक ओपनकास्ट लिग्नाइट खदान मानी जाती है। इसकी शुरुआत वर्ष 1994 में की गई थी।

यह माइंस गिरल लिग्नाइट पावर प्लांट को ईंधन सप्लाई करने का बड़ा स्रोत है। लेकिन अब स्थानीय रोजगार और मजदूरों के मुद्दों को लेकर यहां लंबे समय से विरोध जारी है।

फिलहाल पूरे घटनाक्रम के बाद बाड़मेर की राजनीति गरमा गई है। विधायक भाटी के इस कदम को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *