सम्पादक / राजस्थान हाई कोर्ट ने प्रदेश में लंबित पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को 31 जुलाई 2026 तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने इसके साथ ही ओबीसी आयोग को भी 20 जून तक अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा है। कोर्ट के इस फैसले के बाद राजस्थान की राजनीति में नया विवाद शुरू हो गया है।
दरअसल, हाईकोर्ट ने इससे पहले भी राज्य सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव कराने के आदेश दिए थे, लेकिन सरकार की ओर से ओबीसी आरक्षण और आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए चुनाव टाल दिए गए थे। अब कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए तय समयसीमा में चुनाव करवाने के निर्देश दिए हैं।
सरकार ने फिर OBC आयोग का हवाला दिया
हाईकोर्ट के फैसले के बाद संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि अभी कोर्ट के आदेश की कॉपी नहीं मिली है। आदेश का अध्ययन करने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने ओबीसी आयोग को 20 जून तक रिपोर्ट देने को कहा है, लेकिन आयोग कब तक रिपोर्ट देता है यह उसी पर निर्भर करेगा। रिपोर्ट आने के बाद सरकार आगे की प्रक्रिया शुरू करेगी। वहीं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने भी कहा कि कोर्ट के आदेश का अध्ययन करने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
कांग्रेस ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
हाईकोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर करने के आरोप लगाए हैं। गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि भाजपा सरकार बनने के बाद से पंचायत और नगर निकायों में चुने हुए प्रतिनिधियों के अधिकार खत्म कर प्रशासनिक अधिकारियों के जरिए शासन चलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर ओबीसी आयोग के गठन और सर्वे प्रक्रिया में देरी की, ताकि चुनाव टाले जा सकें। डोटासरा ने दावा किया कि सरकार तय समय सीमा में भी चुनाव नहीं कराएगी और जरूरत पड़ने पर कांग्रेस इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएगी।
“कांग्रेस के संघर्ष की जीत”
राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए इसे कांग्रेस के संघर्ष की जीत बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की मंशा शुरुआत से चुनाव टालने की रही है, लेकिन कांग्रेस लगातार इस मुद्दे को जनता और अदालत के सामने उठाती रही।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। एक ओर सरकार ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, वहीं विपक्ष इसे लोकतंत्र और स्थानीय स्वशासन से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताकर सरकार को घेरने में जुट गया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या सरकार तय समयसीमा के भीतर चुनाव करवा पाएगी या यह मामला आगे फिर अदालत तक पहुंचेगा।




