बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दाम, बेरोजगारी और महंगाई के बीच आखिर कब जागेगी सरकार?

बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दाम, बेरोजगारी और महंगाई के बीच आखिर कब जागेगी सरकार?

केशर सिंह, सम्पादक – सांचल डेस्कटॉप / देश आज जिस दौर से गुजर रहा है, वहां आम आदमी की जिंदगी धीरे-धीरे संघर्ष में बदलती जा रही है। कभी पेट्रोल-डीजल के दाम जनता की कमर तोड़ रहे हैं, तो कभी बिजली, गैस और रोजमर्रा की चीजों की महंगाई लोगों की जेब खाली कर रही है। दूसरी तरफ बेरोजगारी का ऐसा संकट खड़ा हो चुका है कि पढ़े-लिखे युवा डिग्रियां लेकर सड़कों पर घूम रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर देश का आम नागरिक कब तक केवल भाषण सुनेगा और कब उसे राहत मिलेगी?

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एक समय था जब विपक्ष में रहते हुए नेता पेट्रोल के दामों में मामूली बढ़ोतरी पर भी सड़कों पर उतर आते थे। सिलेंडर लेकर प्रदर्शन होते थे, सरकार को जनविरोधी बताया जाता था और आम जनता की चिंता करने की बड़ी-बड़ी बातें की जाती थीं। लेकिन आज जब पेट्रोल 100 रुपये के पार पहुंच चुका है, डीजल लगातार महंगा हो रहा है और गैस सिलेंडर आम परिवार की पहुंच से बाहर होता जा रहा है, तब सत्ता में बैठे लोगों की संवेदनाएं आखिर कहां गायब हो गई हैं?

INDIA-PROTEST-ECONOMY-PETROL

देश का मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा पिस रहा है। नौकरी करने वाला व्यक्ति महीनेभर मेहनत करता है, लेकिन आधी कमाई पेट्रोल, बिजली और राशन में निकल जाती है। गांव का किसान डीजल महंगा होने से परेशान है क्योंकि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। छोटे व्यापारी बिजली कटौती और महंगाई से टूट रहे हैं। युवाओं के सामने सबसे बड़ा सवाल रोजगार का है। लाखों पढ़े-लिखे युवा सरकारी नौकरियों की तैयारी करते-करते उम्र पार कर रहे हैं, लेकिन भर्ती या तो निकलती नहीं या सालों तक अटकी रहती है।

LPG, Petrol, Diesel price hike disappoints people - Oneindia News

आज सोशल मीडिया और सड़कों पर जनता का गुस्सा साफ दिखाई देता है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर विकास का फायदा किसे मिल रहा है? अगर देश तरक्की कर रहा है तो फिर आम आदमी इतना परेशान क्यों है? क्यों हर घर में खर्च बढ़ रहा है लेकिन आमदनी नहीं?

Young Indian women are being let down in labour market. What governments must do

सरकार हर मुद्दे पर बड़ी योजनाओं और आंकड़ों की बात करती है, लेकिन जमीन पर हालात अलग दिखाई देते हैं। बेरोजगार युवा निराश हैं, व्यापारी मंदी से जूझ रहे हैं और गरीब आदमी महंगाई के बोझ तले दबता जा रहा है। जनता को अब भाषण नहीं, राहत चाहिए। लोगों को रोजगार चाहिए, सस्ती बिजली चाहिए, पेट्रोल-डीजल में राहत चाहिए और सबसे जरूरी — सरकार को जनता की आवाज सुननी चाहिए।

INDIA-ECONOMY-FUEL-STRIKE

लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने का नाम नहीं होता। लोकतंत्र का असली मतलब जनता के दर्द को समझना और समय रहते समाधान देना होता है। अगर सरकार जनता की समस्याओं को नजरअंदाज करती रही, तो आने वाले समय में यही नाराजगी बड़े जनआंदोलन का रूप भी ले सकती है।

आज जरूरत इस बात की है कि सत्ता में बैठे लोग जमीन की हकीकत देखें। एयर कंडीशनर वाले कमरों से बाहर निकलें और उस आम नागरिक की जिंदगी को समझें जो हर दिन महंगाई और बेरोजगारी से लड़ रहा है। क्योंकि आखिरकार लोकतंत्र में सबसे बड़ी ताकत जनता ही होती है, और जब जनता सवाल पूछना शुरू कर देती है तो बड़े-बड़े सिंहासन भी हिल जाते हैं।

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