पाली के बांगड़ हॉस्पिटल में बड़ा लापरवाही मामला थैलेसीमिया पीड़ित मासूम को चढ़ाया गलत ब्लड, हालत बिगड़ने पर PICU में भर्ती

पाली के बांगड़ हॉस्पिटल में बड़ा लापरवाही मामला थैलेसीमिया पीड़ित मासूम को चढ़ाया गलत ब्लड, हालत बिगड़ने पर PICU में भर्ती

बांगड़ हॉस्पिटल में एक बड़ी चिकित्सकीय लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां थैलेसीमिया से पीड़ित 5 साल की बच्ची को गलत ब्लड चढ़ा दिया गया। बच्ची ने खून चढ़ाने के दौरान सिर दर्द और ठंड लगने की शिकायत की, जिसके बाद परिजनों को गड़बड़ी का पता चला।

परिजनों का आरोप है कि बच्ची का ब्लड ग्रुप O पॉजिटिव होने के बावजूद उसे B पॉजिटिव ब्लड चढ़ाया गया। मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया।

बच्ची ने खुद बताई तबीयत बिगड़ने की बात

बच्ची की मां के अनुसार उनकी बेटी पिछले कई वर्षों से थैलेसीमिया बीमारी से पीड़ित है और उसे हर महीने दो बार ब्लड चढ़ाना पड़ता है। बुधवार सुबह बच्ची को ब्लड चढ़ाने के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दोपहर करीब एक बजे ब्लड चढ़ाना शुरू किया गया, लेकिन कुछ ही मिनटों बाद बच्ची ने सिर दर्द और सर्दी लगने की शिकायत की। मां की नजर जब ब्लड बैग पर पड़ी तो उस पर अलग ब्लड ग्रुप लिखा देखकर वह घबरा गई और तुरंत नर्सिंग स्टाफ को बुलाया। इसके बाद ब्लड चढ़ाना तुरंत बंद किया गया।

हालत बिगड़ने पर PICU में शिफ्ट

घटना के बाद बच्ची को तुरंत PICU वार्ड में शिफ्ट किया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है। फिलहाल बच्ची की हालत स्थिर बताई जा रही है।

जांच के लिए बनाई तीन सदस्यीय कमेटी

अस्पताल अधीक्षक डॉ. कैलाश परिहार ने मामले को गंभीर मानते हुए जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है, जिसमें ब्लड बैंक प्रभारी सहित अन्य डॉक्टरों को शामिल किया गया है। यह टीम यह पता लगाएगी कि ब्लड मिलान में आखिर कहां चूक हुई और जिम्मेदार कौन है।

परिजनों ने कलेक्टर से की शिकायत

घटना के बाद बच्ची के माता-पिता ने जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत देकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते उन्हें गलती का पता नहीं चलता तो बच्ची की जान भी जा सकती थी।

अस्पताल प्रशासन पर उठे सवाल

इस घटना के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली और ब्लड ट्रांसफ्यूजन सिस्टम पर सवाल खड़े होने लगे हैं। लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में इस तरह की लापरवाही मरीजों की जिंदगी के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

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