युवाओं को जूडो, कराटे, तीरंदाजी और तलवारबाजी जैसी विधाएं सीखनी चाहिए, धीरेंद्र शास्त्री का बयान कहा कि मठ से बाहर निकलना पड़ेगा

युवाओं को जूडो, कराटे, तीरंदाजी और तलवारबाजी जैसी विधाएं सीखनी चाहिए, धीरेंद्र शास्त्री का बयान कहा कि मठ से बाहर निकलना पड़ेगा

बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले स्थित गढ़ा में 301 कन्याओं के विवाह समारोह के दौरान कहा कि धर्म केवल सीता-राम कहने से नहीं बचेगा. इस बयान के बाद उनका वक्तव्य चर्चा का विषय बन गया है. उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आत्मरक्षा भारत के संविधान का अधिकार है धीरेंद्र शास्त्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट कहा कि अगर हिन्दुत्व को बचाना है तो मठ से बाहर निकलना पड़ेगा और माला के साथ भाला भी रखना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि मठ में बैठकर सीता राम कहना ठीक है, लेकिन मठ में बैठ कर धर्म की रक्षा नहीं कर सकते, इसके लिए मठ से बाहर आना होगा. उन्होंने कहा कि आत्मरक्षा के लिए तैयार रहना जरूरी है

उन्होंने विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण देने की बात कही. उनका कहना था कि जूडो, कराटे और अन्य मार्शल आर्ट्स मुसीबत के समय काम आते हैं और यह हर व्यक्ति को आना चाहिए. उन्होंने संविधान में दिए गए आत्मरक्षा के अधिकार का उल्लेख करते हुए कहा कि यह किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए है. इसी संदर्भ में उन्होंने धार्मिक आस्था के साथ सजगता को जोड़ने की बात रखी यह पहली बार नहीं है जब धीरेंद्र शास्त्री ने इस तरह का बयान दिया हो. इससे पहले भी वे कई मौकों पर आत्मरक्षा और हिन्दुत्व को लेकर अपने विचार सार्वजनिक मंचों से रख चुके हैं

बता दें कि 13 फरवरी से 300 कन्याओं के विवाह के अलग-अलग कार्यक्रम शुरू हो जाएंगे. 13 फरवरी को मेंहदी की रस्म होगी. 14 फरवरी को संगीत शुरू का प्रोग्राम है और 15 फरवरी को सात फेरे, बारात और विदाई होनी है. बताया जा रहा है कि प्रत्येक जोड़े को 30,000 की एफडी दी जाएगी. साथ ही सोने की लौंग और बाली का भी देने का ऐलान किया गया है. इसके अलावा दुल्हनों को मंगसूत्र के साथ-साथ ढाई लाख की राशि दी जाएगी

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