दम है तो 12 साल के पेपर लीक की CBI जांच कराए सरकार, विधानसभा में दिलावर से भिड़े डोटासरा

दम है तो 12 साल के पेपर लीक की CBI जांच कराए सरकार, विधानसभा में दिलावर से भिड़े डोटासरा

विधानसभा में मंगलवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा की शुरुआत कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने की। अपने भाषण  के दौरान डोटासरा ने मौजूदा सरकार और पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार में भी पेपर लीक के आरोप लगाते हुए कहा कि दम है तो सरकार बीते 12 वर्षों में हुए पेपर लीक की सीबीआई जांच करवा ले।  डोटासरा ने कहा- 2013 से लेकर 2017 में भी रीट सहित कई परीक्षाओं के पेपर लीक हुए। मौजूदा सरकार के वक्त भी नीट, आरयू के पेपरलीक हुए, नवलगढ़ में आरएएस का पेपर खुला मिला। हमारे वक्त भी पेपर लीक हुए, हमने कार्रवाई की। कोई कमी रह गई तो आप कार्रवाई करो। उन्होंने कहा कि वसुंधराजी की भी जांच करो, रोजाना बात करने से कुछ नहीं होता । पेपरलीक से बच्चों का भविष्य बर्बाद नहीं हो, यह हमारा दायित्व होना चाहिए। एक दूसरे पर भाले फेंक रहे हो। शिक्षा मंत्री तो रोज मुझे जेल में भेज रहे हैं और मैं नहा धोकर रोज तैयार होता हूं और अभी तक जेल आई नहीं है।

भाषण के दौरान डोटासरा और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बीच तीखी झड़प भी हो गई। मदन दिलावर बोले कि पूर्ववर्ती सरकार में अशोक गहलोत ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शिक्षकों से पूछा था कि क्या आपको ट्रांसफर के लिए पैसे देने पड़ते हैं तो सभी टीचर्स ने हाथ खड़े किए थे। इस पर डोटासरा ने कहा कि मेरे दादाजी ने मुझे एक बात सिखाई है कि कीचड़ में पत्थर मत फेंकना वरना कीचड़ तुम पर ही उड़ेगा। इसलिए मैं आपके आरोपों को गंभीरता से नहीं लेता। डोटासरा ने कहा कि शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों की पहले कुत्ते भगाने में ड्यूटी लगाई, इसके बाद रामकथा में ड्यूटी लगा दी। आपके स्कूलों का नामांकन घट गया, पौने दो लाख नामांकन कम हो गया। बीच सत्र तबादले कर दिए। पैसे का तो छोड़ दीजिए, 5000 का खेल कर सकता है वो कितना ही बड़ा कर सकता है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के स्कूल जर्जर हालत में हैं, बच्चों के लिए शौचालय तक नहीं हैं और इस पर सरकार गंभीर नहीं है। हाईकोर्ट की चेतावनियों के बावजूद सरकार की “जूं तक नहीं रेंगी” और शिक्षा मंत्री ने बूंदी में पत्र लिखकर शिक्षकों को राम कथा का आयोजन करवाने के लिए कहा है। डोटासरा ने शिक्षा मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि मंत्री कथाओं में व्यस्त रहे और सोशल मीडिया पर सक्रियता दिखाई, लेकिन शिक्षा के नवाचार पर कोई ठोस काम नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी कथा के दौरान मंत्री ने 81 ट्वीट किए, जबकि दो साल में शिक्षा सुधारों पर आठ ट्वीट भी नहीं किए।

ईआरसीपी को लेकर डोटासरा ने कहा कि परियोजना में कोई वास्तविक प्रगति नहीं हुई और केवल चुनिंदा कंपनियों को टेंडर दिए गए। उन्होंने ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की मांग की। यमुना जल समझौते पर उन्होंने कहा कि इससे राजस्थान के हितों से समझौता हुआ है। मनरेगा को लेकर उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहले केंद्र 90 प्रतिशत हिस्सा देता था, तो अब राज्य 40 प्रतिशत राशि कैसे जुटाएगा। साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रम पर भी उन्होंने खर्च को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री देश का होता है और यहां उन्हें कांस्टेबलों के नियुक्ति पत्र बांटने के लिए बुला लिया।

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