राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार के रवैये पर नाराजगी, पूछा- क्यों नहीं कराए चुनाव?

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार के रवैये पर नाराजगी, पूछा- क्यों नहीं कराए चुनाव?

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव टालने की राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग की मांग पर सोमवार को हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने तय समय पर चुनाव नहीं कराने को लेकर सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी भी जताई।

बैंच ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार को पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है लेकिन लगातार चुनाव टालने की कोशिश की जा रही है। अदालत ने साफ कहा कि यह रवैया उचित नहीं है। सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने अदालत को बताया कि निकाय चुनावों के वार्डों के आंतरिक परिसीमन को लेकर हाईकोर्ट के दो अलग-अलग फैसले आने से प्रक्रिया प्रभावित हुई और चुनाव में देरी हुई। इस पर अदालत ने सवाल उठाते हुए कहा कि आदेश केवल निकायों को लेकर था, फिर पंचायत चुनाव समय पर क्यों नहीं कराए गए?

महाधिवक्ता ने जवाब में कहा कि ओबीसी आरक्षण को लेकर आयोग की रिपोर्ट लंबित होने के कारण चुनाव करवाना संभव नहीं हो पाया। उन्होंने बताया कि सरकार ने 9 मई 2025 को ओबीसी आयोग का गठन कर दिया था, लेकिन आयोग ने रिपोर्ट तैयार करने के लिए कई बार अतिरिक्त समय मांगा, जिसके चलते उसका कार्यकाल बढ़ाया गया।

इस पर बैंच ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि ओबीसी आयोग क्या कर रहा है, इसकी स्पष्ट जानकारी अदालत के सामने नहीं है, अन्यथा उसे भी निर्देश दिए जा सकते थे।

गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। साथ ही 31 दिसंबर 2025 तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई के दौरान समयसीमा के भीतर चुनाव कराने की बात कही थी।

अब सरकार और राज्य चुनाव आयोग ने अदालत में प्रार्थना पत्र दायर कर अतिरिक्त समय मांगा है। सरकार ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट, स्कूलों की उपलब्धता, स्टाफ, ईवीएम और अन्य प्रशासनिक संसाधनों की कमी का हवाला दिया है। साथ ही यह भी कहा कि सितंबर से दिसंबर के बीच कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, इसलिए बाद में चुनाव कराने से वन स्टेट-वन इलेक्शन की अवधारणा को मजबूती मिलेगी।

दूसरी ओर पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज देवंदा ने राज्य चुनाव आयोग के खिलाफ अवमानना याचिका दायर कर कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में हाईकोर्ट अब 18 मई को सुनवाई करेगा।

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