नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रविवार को नई दिल्ली स्थित 10 जनपथ पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा हमला बोला। राहुल गांधी ने छात्रों के आंदोलन को लोकतंत्र की जीत बताते हुए कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केवल शुरुआत है, अब देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किए जाने की जरूरत है।
राहुल गांधी ने कहा कि यह जीत किसी एक नेता की नहीं, बल्कि देश के उन लाखों छात्रों की है जिन्होंने अपने भविष्य और शिक्षा व्यवस्था को बचाने के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था कभी दुनिया में सम्मानित मानी जाती थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसे लगातार कमजोर किया गया है।
‘धर्मेंद्र प्रधान सिर्फ एक प्रतीक थे’
राहुल गांधी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और जवाबदेही की कमी का प्रतीक बन चुके थे। उनके अनुसार, केवल मंत्री बदलने से समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में ठोस और संरचनात्मक बदलाव करने होंगे।
उन्होंने कहा कि देश में बढ़ती बेरोजगारी, शिक्षा के निजीकरण और परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन स्वाभाविक प्रतिक्रिया है।
RSS पर साधा निशाना
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था पर RSS का प्रभाव बढ़ने से देश की ज्ञान परंपरा और शैक्षणिक संस्थानों को नुकसान पहुंचा है। उनके अनुसार, शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए इस दिशा में भी बड़े सुधारों की आवश्यकता है।
छात्रों की दो मांगें अभी भी बाकी
राहुल गांधी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्रों की पहली मांग थी, लेकिन अभी दो महत्वपूर्ण मांगें बाकी हैं। उन्होंने मांग की कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर बल प्रयोग करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
अमित शाह पर भी लगाए आरोप
राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ हुई कथित सख्त पुलिस कार्रवाई की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय की है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों पर बल प्रयोग किया गया और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय सरकार को उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।





