जयपुर, 24 अप्रेल। पशुपालन निदेशालय के सभागार में शुक्रवार को विश्व पशु चिकित्सा दिवस के अवसर पर पशु चिकित्सक वेलफेयर सोसायटी ने एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर पशु चिकित्सक समुदाय के सेवानिवृत चिकित्सकों को सम्मानित भी किया गया।
इस अवसर पर विभाग के निदेशक डॉ सुरेश मीना ने कहा कि विश्व पशु चिकित्सा दिवस का दिन पशु चिकित्सकों और उनके महत्वपूर्ण योगदान को सम्मानित करने के साथ साथ पशुओं के स्वास्थ्य और उनके अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाने का भी एक महत्वपूर्ण अवसर है। डॉ मीना ने कहा कि यह दिन इस बात की याद दिलाता है कि जानवरों के स्वास्थ्य को बनाए रखने में पशु चिकित्सक की कितनी महत्वपूर्णं भूमिका है। यह दिन पशु चिकित्सकों के नेक पेशे का सम्मान करने का दिन है। उन लोगों को मान्यता प्रदान करने का दिन है जिन्होंने जानवरों की सेवा करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। पशु चिकित्सक का पेशा दुनिया के सबसे अधिक निःस्वार्थ भाव से काम करने वाले लोगों का पेशा है। मूक प्राणी का दुख दर्द बिना बोले समझ जाना और उन्हें उनके दर्द से उबारना यह केवल एक सेवा ही नहीं बल्कि पुण्य का भी काम है।
उल्लेखनीय है कि हर वर्ष अप्रैल के आखिरी शनिवार को विश्व पशु चिकित्सा दिवस का आयोजन किया जाता है। हर साल विश्व पशु चिकित्सा संघ इस दिन के लिए एक अलग विषय चुनता है। इस वर्ष विश्व पशु चिकित्सा संघ और हेल्थ फॉर एनिमल्स ने विश्व पशु चिकित्सा दिवस 2026 की थीम पशु चिकित्सक भोजन और स्वास्थ्य के संरक्षक की घोषणा की है।
विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ विकास शर्मा ने कहा कि पशु चिकित्सक भोजन और स्वास्थ्य के संरक्षक विषय विश्व स्तर पर खाद्य सुरक्षा, खाद्य आपूर्ति, जन स्वास्थ्य और पशु स्वास्थ्य की रक्षा में पशु चिकित्सा सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करता है। पशु चिकित्सक का काम केवल उपचार तक ही सीमित नहीं है बल्कि वे रोकथाम, जागरूकता और प्रबंधन के माध्यम से पशुपालन क्षेत्र को सुदृढ़ बनाते हैं। उनका कार्य उपभोक्ताओं की रक्षा करता है, टिकाऊ खाद्य प्रणालियों का समर्थन करता है, पशुओं से फैलने वाली बीमारियों को रोकता है और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करता है। इसलिए ग्रामीण विकास और खाद्य सुरक्षा के लिए पशु चिकित्सकों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर विभाग के संयुक्त निदेशक तथा पशु चिकित्सक वेलफेयर सोसायटी के सचिव डॉ तपेश माथुर ने विषय पर अपनी प्रस्तुति देते हुए कहा कि पशुचिकित्सा का संबंध केवल पशुओं के इलाज तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण संतुलन और आर्थिक विकास से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। आज के दौर में वन हेल्थ की अवधारणा के तहत यह माना जाता है कि मानव, पशु और पर्यावरण का स्वास्थ्य आपस में जुड़ा हुआ है। ऐसे में पशु चिकित्सकों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि पशु चिकित्सक न केवल पशु स्वास्थ्य पेशेवरों के रूप में कार्य करते हैं, बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा, टिकाऊ खाद्य प्रणालियों और आर्थिक लचीलेपन/स्थिरता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर स्वर्गीय डॉ राजीव पुरी, डॉ एस के नागयान, डॉ प्रकाश सिंघल, डॉ उगमसिंह शेखावत तथा डॉ मोहम्मद शफीक को उनके उत्कृष्ट सेवा कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।







