“राम मंदिर आंदोलन में बलिदान देने वाले पहले दो भाई माहेश्वरी थे” माहेश्वरी समाज के राष्ट्रीय महासम्मेलन में बोले गृह मंत्री

“राम मंदिर आंदोलन में बलिदान देने वाले पहले दो भाई माहेश्वरी थे”  माहेश्वरी समाज के राष्ट्रीय महासम्मेलन में बोले गृह मंत्री

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को जोधपुर में माहेश्वरी समाज के राष्ट्रीय महासम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भता का दूसरा पहलू स्वदेशी है। सभी से आह्वान है कि आप ऐसी वस्तुओं का निर्माण करें जो देश में नहीं बनती हों। हमें दुनिया में आगे बढ़ने के लिए हर तरह की भाषा सीखनी चाहिए। प्रगति के लिए यह आवश्यक है। लेकिन स्वभाषा को भी नहीं भूलना है। बच्चों के साथ स्वभाषा का ही प्रयोग करें। घर में मारवाड़ी और राजस्थानी में बात करें। जिससे वह अपनी संस्कृति और इतिहास से जुड़े रहें। यह वह समाज है जो तलवार ओर तराजू दोनों रखते हैं।

उन्होंने कहा कि 11 साल में भारत दुनिया की 11वीं अर्थव्यवस्था से चौथे नंबर पर आ गया है। मुझे पूरा विश्वास है कि अगले एक साल में भारत तीसरे नंबर की अर्थव्यवस्था होगा। सर्वोच्च स्थान पर जाने के लिए एक मात्र रास्ता आत्मनिर्भरता है। इसका एक ही सूत्र है स्वदेशी।

गृहमंत्री ने कहा कि माहेश्वरी समाज के भामाशाहों की सूची बहुत लंबी है । यह वह समाज है, जिसने अपने मूल जड़ को पकड़े रखा है। देश को जिस प्रकार जरूरत पड़ी इस समाज ने सहयोग किया है। माहेश्वरी समाज  जॉब सिकर नहीं जॉब क्रिएटर हैं। संस्कृति पुर्नजागरण के योगदान का महत्व इस बात से लगाया जा सकता है कि आजादी के बाद राम मंदिर आंदोलन में बलिदान देने वाले पहले दो भाई माहेश्वरी थे।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने संबोधित
कार्यक्रम को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने संबोधित करते हुए माहेश्वरी समाज के देश ओर राज्य की प्रगति में दिए योगदान के प्रति आभार प्रकट करते हुए सतत योगदान की बात कही। उन्होंने आगे कहा कि हम एक ऐसे जीवंत साक्षी बनने जा रहे हैं। यह आयोजन एक सम्मेलन नहीं माहेश्वरी समाज की एकता का परिचायक भी है। यह प्रमाण है कि माहेश्वरी समाज आज भी अपनी जमीनी जड़ों से जुड़ा हुआ है और और राष्ट्रीय योगदान के प्रति तत्पर पर है।

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