राजस्थान में तापमान 43 डिग्री के करीब पहुंच चुका है. झारखंड में हीटवेव का अलर्ट जारी है. दिल्ली में हाइपरलोकल हीट यानी इलाके-इलाके में अलग-अलग खतरनाक गर्मी का नया ट्रेंड सामने आया है. मौसम विभाग और वैज्ञानिकों की ताजा रिपोर्ट साफ संकेत दे रही है. इस बार गर्मी सिर्फ ज्यादा नहीं होगी, बल्कि ज्यादा खतरनाक और लंबे समय तक रहने वाली हो सकती है
बढ़ता पारा और हीटवेव का खतरा
राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में अगले 3-4 दिनों तक मौसम सूखा रहने वाला है. इसी के साथ तापमान में 1-2 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी का अनुमान है. पश्चिमी राजस्थान में तो पारा 41 से 43 डिग्री के बीच पहुंच सकता है, जो सामान्य से 3-4 डिग्री ज्यादा है.
गुरुवार को बाड़मेर 42.9 डिग्री के साथ सबसे गर्म रहा, जबकि जैसलमेर 42.8 और चूरू 42.4 डिग्री पर पहुंच गया. जयपुर भी 39.8 डिग्री तक पहुंच चुका है. हालांकि 17 अप्रैल को एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के असर से जयपुर, भरतपुर और बीकानेर संभाग में हल्की बारिश और 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. लेकिन राहत सीमित और अस्थायी ही होगी
खतरा और गहरा
गर्मी को लेकर सबसे अहम और चिंताजनक संकेत IIT बॉम्बे की नई रिसर्च से मिले हैं. इस अध्ययन में साफ कहा गया है कि इंडो-गंगेटिक प्लेन्स (IGP) में हीटवेव अब सिर्फ बाहर से आने वाली गर्म हवाओं का नतीजा नहीं रही, बल्कि स्थानीय जमीन और मौसम की स्थितियां इसे ज्यादा प्रभावित कर रही हैं
स्टडी की लीड ऑथर मनाली साहा ने बताया, ‘पारंपरिक रूप से यह देखा जाता था कि उत्तर-पश्चिम से गर्म हवा आ रही है या नहीं, लेकिन हमारे नतीजे बताते हैं कि स्थानीय जमीन और वायुमंडलीय स्थितियों की निगरानी ज्यादा जरूरी है. यह बदलाव व्यापक चेतावनियों से हटकर स्थान-विशिष्ट (लोकेशन-स्पेसिफिक) अलर्ट देने में मदद करेगा.’
रिसर्च में हीटवेव को दो हिस्सों में बांटा गया है. ह्यूमिड (नमी वाली) और ड्राई (शुष्क), ह्यूमिड हीटवेव शरीर के लिए ज्यादा खतरनाक होती है क्योंकि इसमें पसीना शरीर को ठंडा नहीं कर पाता. वहीं, ड्राई हीटवेव लंबे समय तक चलती है और बड़े इलाके को प्रभावित करती है.
साहा ने चेताया कि दोनों तरह की हीटवेव जानलेवा हो सकती हैं. ह्यूमिड हीटवेव में पसीना बेअसर हो जाता है, जबकि ड्राई हीटवेव ज्यादा समय तक चलती है और बड़े क्षेत्र को प्रभावित करती है
दिल्ली में बढ़ता हाइपरलोकल हीट संकट
दिल्ली में गर्मी अब सिर्फ तापमान के आंकड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह हाइपरलोकल हीट के रूप में एक नए खतरे की तरह उभर रही है. हालिया स्टडी में सामने आया है कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में जमीन की सतह का तापमान (LST) तेजी से बढ़ रहा है. इससे कुछ इलाके बाकी शहर की तुलना में कहीं ज्यादा गर्म हो चुके हैं.
Envirocatalysts की रिपोर्ट बताती है कि पिछले 10 सालों में कई इलाकों में LST में तेज उछाल दर्ज हुआ है. सबसे ज्यादा बढ़ोतरी साउथ दिल्ली के भाटी में +6.1°C रही, जबकि मदनपुर खादर ईस्ट और बदरपुर में +5.9°C और गौतमपुरी में +5.7°C का इजाफा हुआ है.
इस पर संस्था के फाउंडर सुनील दहिया ने कहा कि इस विश्लेषण का अहम बिंदु यह है कि यह दिखाता है कि दिल्ली के किन इलाकों में स्थानीय स्तर पर हीट एडाप्टेशन प्लान और नीतिगत बदलाव की जरूरत है.
उन्होंने साफ किया कि किसी इलाके में पार्क, जलाशय या हरियाली की जगह कंक्रीट और निर्माण बढ़ने से हाइपरलोकल हीट बढ़ती है. धातु, ग्रेनाइट और कंक्रीट जैसी सामग्री भी गर्मी को ज्यादा अवशोषित करती है.
रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल में औसतन LST 3.5°C बढ़ा है, जबकि UTCI में 3.4 की वृद्धि दर्ज हुई है. इसका मतलब साफ है—दिल्ली में अब गर्मी सिर्फ दिख नहीं रही, बल्कि ज्यादा तीव्रता से महसूस भी हो रही है.
झारखंड: 7 जिलों में येलो अलर्ट, 19-20 अप्रैल सबसे भारी
झारखंड में भी गर्मी खतरनाक स्तर की ओर बढ़ रही है. मौसम विभाग ने 19 और 20 अप्रैल के लिए हीटवेव का येलो अलर्ट जारी किया है. आईएमडी रांची के डिप्टी डायरेक्टर अभिषेक आनंद ने कहा कि मौसम शुष्क रहेगा, और अधिकतम तापमान कल से दो से तीन डिग्री तक बढ़ने की संभावना है. सात जिलों के लिए हीटवेव का येलो अलर्ट जारी किया गया है











