धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: क्या यह मोदी सरकार की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती है? जानिए 36 दिन के आंदोलन से इस्तीफे तक की पूरी कहानी

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: क्या यह मोदी सरकार की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती है? जानिए 36 दिन के आंदोलन से इस्तीफे तक की पूरी कहानी

नई दिल्ली। NEET-UG परीक्षा विवाद और जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चले छात्र आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे इस्तीफे में उन्होंने कहा कि छात्रों का भविष्य किसी भी राजनीतिक विवाद से ऊपर है और इसी भावना के साथ उन्होंने यह फैसला लिया। इस घटनाक्रम के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इसे अपनी सबसे बड़ी जीत बताया, जबकि राजनीतिक विश्लेषक इसे मोदी सरकार के लिए पिछले कई वर्षों का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका मान रहे हैं।

36 दिन के आंदोलन ने बदली तस्वीर

कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जून 2026 को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शुरू किया था। संगठन की सबसे बड़ी मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थी। आंदोलन के दौरान ‘संसद चलो’ मार्च निकाला गया, जिसमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ। लाठीचार्ज और आंसू गैस के बाद आंदोलन और तेज हो गया। जो विरोध शुरुआत में केवल NEET परीक्षा तक सीमित था, वह धीरे-धीरे शिक्षा व्यवस्था और सरकारी जवाबदेही का राष्ट्रीय मुद्दा बन गया।

24 जुलाई को सरकार और CJP के बीच संविधान क्लब में बातचीत हुई। संगठन ने साफ कर दिया कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी गैर-समझौतावादी मांग है। सरकार ने विचार के लिए समय मांगा, लेकिन अगले ही दिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की घोषणा ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया।

इस्तीफे में छात्रों का किया जिक्र

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में लिखा कि वह पिछले चार दशकों से शिक्षा और छात्रों के हित में काम करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि NEET-UG परीक्षा से जुड़े घटनाक्रम ने उन्हें गहरा दुख पहुंचाया है। उनका मानना है कि छात्रों का भविष्य किसी भी राजनीतिक विवाद या कानूनी लड़ाई में नहीं उलझना चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मंत्रिमंडल के सहयोगियों और शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों का सहयोग के लिए आभार भी व्यक्त किया।

CJP ने बताया आंदोलन की जीत

इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने जश्न मनाया। CJP प्रमुख अभिजीत दीपके ने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि लाखों छात्रों और युवाओं के संघर्ष की जीत है। वहीं, पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि आंदोलन अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और बाकी मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।

क्यों माना जा रहा है बड़ा राजनीतिक झटका?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम ने कई बड़े संदेश दिए हैं। पहली बार किसी छात्र आंदोलन ने केंद्र सरकार पर इतना व्यापक दबाव बनाया। सोशल मीडिया के जरिए युवाओं की भागीदारी ने आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया। विपक्ष को भी सरकार के खिलाफ एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा मिला।

विश्लेषकों का कहना है कि यह घटनाक्रम आने वाले समय में शिक्षा नीति, परीक्षा प्रणाली और सरकार की राजनीतिक रणनीति पर असर डाल सकता है।

अभी खत्म नहीं हुआ आंदोलन

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बावजूद CJP ने साफ किया है कि उनकी कुछ मांगें अभी भी बाकी हैं। संगठन ने देशभर में कैंडल मार्च निकालने का ऐलान किया है और कहा है कि पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामलों, मुआवजे और अन्य मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।

हालांकि, सरकार की ओर से इन मांगों पर अंतिम और आधिकारिक निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।

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