नई दिल्ली। नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि इस्तीफे के बाद भी कांग्रेस ने इस मुद्दे को खत्म मानने से इनकार करते हुए केंद्र सरकार के सामने दो नई मांगें रखी हैं।
देशभर में हुआ था विरोध प्रदर्शन
नीट पेपर लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर लंबे समय तक प्रदर्शन चला। आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की। इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी 25 दिनों तक अनशन कर आंदोलन का समर्थन किया।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
इस मुद्दे पर कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर रहे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करने का प्रयास भी किया। विपक्ष का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में हुई गड़बड़ियों और पेपर लीक मामले में सरकार जवाबदेही तय करने में विफल रही।
कांग्रेस की दो प्रमुख मांगें
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कांग्रेस ने कहा कि केवल इस्तीफा पर्याप्त नहीं है। पार्टी ने सरकार से दो प्रमुख मांगें की हैं—
- प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी परीक्षा विवाद और उससे प्रभावित छात्रों एवं उनके परिवारों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
राजनीतिक घमासान जारी
कांग्रेस का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में आई खामियों से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है, इसलिए सरकार को इसकी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। वहीं, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी तेज बनी हुई है। अब सभी की नजर केंद्र सरकार के अगले कदम और विपक्ष की मांगों पर है।

