रुण (नागौर)। आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम बुधवार को रुण कस्बे में देखने को मिला, जहां श्री सिंहड़देव भोमियाजी महाराज की अष्टधातु अश्वरोही प्रतिमा का तीन दिवसीय भव्य प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव वैदिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। रत्नासागर तालाब स्थित नवविकसित पार्क में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में राजस्थान सहित विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। पूरे महोत्सव के दौरान रुण नगरी भक्ति, श्रद्धा और उत्साह के रंग में रंगी रही।
महोत्सव के अंतिम दिन वैदिक मंत्रोच्चार, हवन-यज्ञ, कलश यात्रा और प्रतिमा के विधिवत अनावरण के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। वैदिक आचार्यों के सान्निध्य में मंत्रोच्चार के बीच प्राण-प्रतिष्ठा की प्रक्रिया पूरी हुई, जिसके बाद श्रद्धालुओं ने भगवान भोमियाजी महाराज के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और क्षेत्र की उन्नति की कामना की।

भजन संध्या में भक्ति का सागर उमड़ा
महोत्सव के दूसरे दिन मंगलवार रात्रि आयोजित विशाल भजन संध्या में श्रद्धालु देर रात तक भक्ति रस में डूबे रहे। प्रसिद्ध भजन गायक राधे भट्ट ने एक से बढ़कर एक भक्तिमय प्रस्तुतियां देकर माहौल को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया। उनके भजनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। वहीं सांस्कृतिक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत धार्मिक झांकियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया।
31 दंपतियों ने दी यज्ञ में आहुति
बुधवार सुबह आयोजित यज्ञ में 31 दंपतियों ने वैदिक विधि-विधान के अनुसार आहुति अर्पित की। यज्ञ के दौरान विश्व शांति, अच्छी वर्षा, जनकल्याण, सामाजिक समरसता और राष्ट्र की उन्नति की कामना की गई। पूरे वातावरण में वैदिक मंत्रों की गूंज और हवन की सुगंध से श्रद्धा का अद्भुत माहौल बना रहा।
भव्य कलश यात्रा ने मोहा सभी का मन
प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान निकाली गई विशाल कलश यात्रा आकर्षण का केंद्र रही। पारंपरिक वेशभूषा में सजी-धजी सैकड़ों महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर यात्रा में भाग लिया। ढोल-नगाड़ों, शंखध्वनि और जयघोषों के बीच निकली यात्रा का विभिन्न स्थानों पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। पूरा कस्बा “जय श्री भोमियाजी महाराज” के जयकारों से गूंज उठा।

संतों ने दिया धर्म और सामाजिक एकता का संदेश
धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य ओमप्रकाश दासजी महाराज सहित विभिन्न संत-महात्माओं ने भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, धर्म रक्षा, सामाजिक समरसता और मानव सेवा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने, नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का कार्य करते हैं।
महाप्रसादी में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
प्राण-प्रतिष्ठा के बाद आयोजित महाप्रसादी में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, भोजन, चिकित्सा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं। स्वयंसेवकों ने पूरे आयोजन के दौरान व्यवस्था संभालते हुए श्रद्धालुओं की सेवा की।
आयोजन समिति ने जताया आभार
महोत्सव के सफल आयोजन के बाद आयोजन समिति ने संत-महात्माओं, प्रशासन, पुलिस विभाग, भामाशाहों, दानदाताओं, स्वयंसेवकों और समस्त ग्रामवासियों का आभार व्यक्त किया। समिति ने कहा कि सभी के सहयोग और समर्पण से यह तीन दिवसीय धार्मिक महोत्सव ऐतिहासिक और यादगार बन सका।
श्री सिंहड़देव भोमियाजी महाराज की अष्टधातु अश्वरोही प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ रुण में आयोजित यह धार्मिक महोत्सव श्रद्धा, संस्कृति, सामाजिक एकता और लोक आस्था का अनुपम उदाहरण बन गया। पूरे आयोजन ने क्षेत्र में धार्मिक चेतना और सांस्कृतिक गौरव की नई ऊर्जा का संचार किया।

