नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इन दिनों ‘रिजर्वेशन हटाओ मूवमेंट’ तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर), फेसबुक और टेलीग्राम समेत कई प्लेटफॉर्म पर इस अभियान से जुड़े पोस्ट और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। अभियान से जुड़े सोशल मीडिया पेजों पर दावा किया जा रहा है कि इससे 10 लाख से अधिक लोग जुड़ चुके हैं। हालांकि, इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
क्या है रिजर्वेशन हटाओ मूवमेंट?
यह एक सोशल मीडिया आधारित अभियान है, जिसमें कुछ लोग शिक्षा और सरकारी नौकरियों में लागू मौजूदा आरक्षण व्यवस्था को समाप्त करने या उसमें बड़े बदलाव की मांग कर रहे हैं। अभियान से जुड़े लोग ‘मेरिट आधारित चयन’, ‘समान अवसर’ और आरक्षण नीति की समीक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे हैं।
पिछले कुछ दिनों में इस अभियान से जुड़े हैशटैग और वीडियो लाखों बार देखे जा चुके हैं। कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और यूजर्स भी इस विषय पर अपनी राय रख रहे हैं, जिसके चलते यह मुद्दा तेजी से ट्रेंड कर रहा है।
समर्थन और विरोध दोनों
जहां एक वर्ग इस अभियान का समर्थन कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कई सामाजिक संगठन, छात्र संगठन और आरक्षण समर्थक इसे सामाजिक न्याय के खिलाफ बताते हुए विरोध भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि आरक्षण संविधान द्वारा प्रदत्त व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को समान अवसर उपलब्ध कराना है।
क्या सरकार ने लिया कोई फैसला?
फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से आरक्षण व्यवस्था को समाप्त करने या उसमें किसी बड़े बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। संविधान के तहत लागू आरक्षण व्यवस्था में किसी भी बड़े बदलाव के लिए कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया अपनानी होती है। ऐसे में सोशल मीडिया पर चल रहा यह अभियान किसी सरकारी निर्णय का संकेत नहीं माना जा सकता।
वायरल दावों से रहें सावधान
इस अभियान के दौरान सोशल मीडिया पर कई ऐसे पोस्ट और संदेश भी वायरल हुए हैं जिनकी सत्यता की पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी वायरल दावे पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना चाहिए।
आगे क्या होगा?
फिलहाल यह अभियान सोशल मीडिया तक सीमित दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में यह किसी बड़े जन आंदोलन का रूप लेता है या नहीं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। वहीं आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर देशभर में बहस तेज हो गई है और अलग-अलग वर्ग अपनी-अपनी राय खुलकर सामने रख रहे हैं।

