जयपुर। राजस्थान में गौशालाओं को दिए जाने वाले सरकारी अनुदान को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। हाल ही में सामने आई ऑडिट रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं की ओर इशारा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश की 38 गौशालाओं में वास्तविक संख्या से अधिक गोवंश दिखाकर सरकारी अनुदान लेने के मामले सामने आए हैं। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में मृत गोवंश अथवा गौशाला में मौजूद नहीं रहे पशुओं के नाम पर भी अनुदान का दावा किए जाने की बात सामने आई है। इस खुलासे के बाद गौसेवा के नाम पर मिलने वाले सरकारी अनुदान की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार इन अनियमितताओं के चलते करीब 57.36 करोड़ रुपये के अतिरिक्त भुगतान का मामला सामने आया है। इसके बाद संबंधित गौशालाओं से जवाब तलब किया गया है और रिकवरी की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। अब पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।
रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में मिला बड़ा अंतर
ऑडिट के दौरान गौशालाओं के रिकॉर्ड, गोवंश की संख्या, निरीक्षण रिपोर्ट और अनुदान से जुड़े दस्तावेजों का मिलान किया गया। जांच में कई जगह रिकॉर्ड में दर्ज गोवंश और मौके पर वास्तविक संख्या में अंतर पाया गया। कुछ मामलों में ऐसे पशुओं के नाम पर भी अनुदान लेने का दावा सामने आया, जो मृत हो चुके थे या गौशाला में मौजूद नहीं थे। यदि जांच में ये तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला माना जाएगा।
अब होगी गहन जांच, दोषियों पर कार्रवाई की तैयारी
मामले के सामने आने के बाद संबंधित विभागों ने जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच की जाएगी। जहां भी अनियमितता प्रमाणित होगी वहां नियमानुसार कार्रवाई के साथ सरकारी राशि की वसूली भी की जाएगी। विभाग रिकॉर्ड, निरीक्षण रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों का दोबारा सत्यापन कर रहा है।
कुछ गौशाला संचालकों ने आरोपों से किया इनकार
दूसरी ओर कुछ गौशाला संचालकों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि कई मामलों में रिकॉर्ड अपडेट नहीं होने और दस्तावेजी त्रुटियों के कारण आंकड़ों में अंतर दिखाई दिया है। उनका कहना है कि जांच पूरी होने के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
सांचल न्यूज़ ने पहले ही उठाए थे सवाल
गौरतलब है कि सांचल न्यूज़ ने ऑडिट रिपोर्ट सामने आने से पहले ही पाली और सुमेरपुर क्षेत्र की कुछ गौशालाओं में अनुदान वितरण और गोवंश के रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठाए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए सांचल न्यूज़ की ओर से संबंधित विभागों और जिम्मेदार अधिकारियों को जांच के लिए रिपोर्ट और शिकायत भी भेजी गई है।
अब प्रदेश स्तर पर ऑडिट रिपोर्ट में सामने आए खुलासों के बाद पाली और सुमेरपुर क्षेत्र की गौशालाओं को लेकर भी स्थानीय स्तर पर जांच की मांग तेज हो गई है। लोगों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि संबंधित विभाग इन शिकायतों पर कब कार्रवाई करता है और जांच का दायरा किन-किन गौशालाओं तक पहुंचता है।
हर शिकायत पर रहेगी सांचल न्यूज़ की नजर
सांचल न्यूज़ लगातार इस पूरे मामले की पड़ताल कर रहा है। यदि पाली, सुमेरपुर या प्रदेश के किसी अन्य क्षेत्र की गौशालाओं में अनुदान वितरण में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो उससे जुड़े दस्तावेज, तथ्य और जांच की हर अपडेट पाठकों तक पहुंचाई जाएगी। हमारा उद्देश्य किसी संस्था या व्यक्ति को बिना जांच दोषी ठहराना नहीं, बल्कि सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और जनता से जुड़े हर महत्वपूर्ण मुद्दे को तथ्यात्मक रूप से सामने लाना है।
अब सबकी निगाहें जांच एजेंसियों और संबंधित विभागों की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होती है तो यह प्रदेश में गौशाला अनुदान व्यवस्था से जुड़े सबसे बड़े मामलों में से एक साबित हो सकता है।

