भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान चीन के सहयोग के लिए पीएम मोदी ने दिया धन्यवाद, जिनपिंग ने कहा- चीन भारत के साथ संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखता है
नई दिल्ली। BRICS Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई अहम द्विपक्षीय बैठक करीब 45 मिनट तक चली और अब समाप्त हो गई है। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों और BRICS में सहयोग को लेकर चर्चा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान चीन से मिले समर्थन और सहयोग के लिए राष्ट्रपति शी जिनपिंग का आभार जताया।
बैठक की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान चीन से मिले समर्थन और सहयोग के लिए वह आभार व्यक्त करते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि अब दोनों देशों के पास द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा करने का अवसर है। प्रधानमंत्री ने जिनपिंग का भारत में एक बार फिर स्वागत भी किया।
जिनपिंग बोले- भारत और चीन एक-दूसरे की ताकत से सीख सकते हैं
बैठक के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत और चीन के बीच मिलकर काम करने पर जोर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, जिनपिंग ने कहा कि दोनों देश एक-दूसरे की ताकत से सीख सकते हैं और मिलकर प्रगति कर सकते हैं।
चीनी पक्ष की ओर से यह भी कहा गया कि चीन भारत के साथ अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखता है। जिनपिंग ने दोनों देशों से BRICS देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने की अपील की।
मोदी-जिनपिंग की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब BRICS के मंच पर भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। दोनों नेताओं की बैठक को भारत-चीन संबंधों के साथ-साथ BRICS के भीतर दोनों देशों के सहयोग के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
भारत की BRICS अध्यक्षता का 8 महीने का सफर
18वें BRICS Summit को लेकर विदेश मंत्रालय के सचिव सुधाकर दलेला ने कहा कि BRICS के लिए यह वर्ष विशेष महत्व रखता है। भारत ने इस साल जनवरी में चौथी बार BRICS की अध्यक्षता संभाली है। इसके साथ ही BRICS के आपसी सहयोग की शुरुआत हुए 20 वर्ष पूरे हो गए हैं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान पिछले वर्षों की बैठकों और पहलों के काम को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच और ‘मानवता सबसे पहले’ के सिद्धांत के अनुरूप BRICS सहयोग को कागजों तक सीमित रखने के बजाय उसे आम लोगों की जरूरतों और भविष्य की चुनौतियों से जोड़ने की कोशिश की गई।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की अध्यक्षता के दौरान विभिन्न विषयों, मंत्रिस्तरीय बैठकों, वर्किंग ग्रुप, बिजनेस सेशन और लोगों से जुड़ी गतिविधियों सहित 350 से अधिक बैठकें आयोजित की गईं। इनमें प्रत्यक्ष और वर्चुअल दोनों तरह की बैठकें शामिल रहीं।
‘ग्लोबल साउथ’ के लिए BRICS की बढ़ती भूमिका
विदेश मंत्रालय ने कहा कि BRICS कार्यक्रमों में लोगों की व्यापक भागीदारी से संगठन के बढ़ते महत्व का पता चलता है। मंत्रालय के अनुसार, विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ के साथ BRICS का दायरा लगातार बढ़ रहा है और भारत की अध्यक्षता में आयोजित गतिविधियों में भागीदारी से इस भूमिका के प्रति भरोसा भी दिखाई देता है।
भारत की ओर से BRICS को ऐसे मंच के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है, जहां विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाएं अपने साझा हितों और चुनौतियों पर मिलकर चर्चा कर सकें।
12 सितंबर को ‘साउथ-साउथ सहयोग’ पर भी फोकस
विदेश मंत्रालय ने यह भी उल्लेख किया कि 12 सितंबर को ‘साउथ-साउथ सहयोग के लिए संयुक्त राष्ट्र दिवस’ के तौर पर मनाया जाता है। मंत्रालय के अनुसार, बदलती वैश्विक व्यवस्था में उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका पर चर्चा के लिए यह महत्वपूर्ण अवसर है।
BRICS के विस्तार और ग्लोबल साउथ में इसकी बढ़ती भूमिका के बीच भारत की अध्यक्षता में इस विषय को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
महबूबा मुफ्ती ने BRICS के बयान का स्वागत किया, भारत पर उठाए सवाल
इस बीच पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने पहलगाम आतंकी हमले की BRICS द्वारा की गई निंदा का स्वागत किया। हालांकि उन्होंने भारत की BRICS अध्यक्षता को लेकर सवाल भी उठाए।
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि BRICS के मौजूदा अध्यक्ष के तौर पर भारत को और अधिक स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए था। उन्होंने गाजा में इजराइल की कार्रवाई और ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमलों की भी निंदा किए जाने की मांग की।
महबूबा ने आतंकवाद की निंदा में कथित दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आतंकवाद की निंदा चुनिंदा तरीके से नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने आम नागरिकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय न्याय के लिए समान मानदंड अपनाने की बात कही।
मोदी-पुतिन की मुलाकात में भी कई मुद्दों पर चर्चा
BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-रूस संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा की।
बैठक में राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कौशल विकास और लोगों के बीच संपर्क सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई।
दोनों नेताओं ने भारत में पहली बार आयोजित इन्नोप्रोम इंडिया अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक प्रदर्शनी का संयुक्त रूप से दौरा भी किया। इसे भारत और रूस के बीच व्यापार एवं औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा गया।
बैठक में पश्चिम एशिया और ब्लैक सी क्षेत्र की स्थिति समेत विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री मोदी ने संघर्षों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को प्रभावी रास्ता बताते हुए शांति प्रयासों में भारत के योगदान की प्रतिबद्धता दोहराई।
BRICS Summit में भारत की कूटनीतिक सक्रियता चर्चा में
BRICS Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की चीन, रूस और ईरान के नेताओं के साथ हुई मुलाकातों ने भारत की कूटनीतिक सक्रियता को सामने रखा है।
एक तरफ भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय बातचीत में सहयोग और दीर्घकालिक संबंधों की बात सामने आई, तो दूसरी ओर रूस के साथ रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग और ईरान के साथ पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा हुई।
मोदी-जिनपिंग की 45 मिनट की बैठक के बाद अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को लेकर आगे क्या ठोस कदम सामने आते हैं। BRICS के मंच से भारत और चीन की यह बातचीत वैश्विक राजनीति में भी महत्वपूर्ण संदेश के तौर पर देखी जा रही है।



