Ram Mandir Donation Theft Case: एसआईटी जांच तेज, महासचिव चंपत राय से पूछताछ, कई सवालों के घेरे में ट्रस्ट और पुलिस

Ram Mandir Donation Theft Case: एसआईटी जांच तेज, महासचिव चंपत राय से पूछताछ, कई सवालों के घेरे में ट्रस्ट और पुलिस

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला अब देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) जांच कर रही है। अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का बयान भी दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर उनसे दोबारा भी पूछताछ की जा सकती है।

सूत्रों के अनुसार चंपत राय ने पूछताछ के दौरान चोरी में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि संदिग्धों की गिरफ्तारी भी उनके कहने पर ही की गई थी। इस बीच चंपत राय और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्र ने अपने-अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि दोनों के इस्तीफों पर अंतिम निर्णय 6 जुलाई को होने वाली श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में लिया जाएगा।

43 दिनों में 70 बार चोरी का दावा

एसआईटी की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि 24 अप्रैल से 5 जून के बीच करीब 43 दिनों में चढ़ावे की राशि में लगभग 70 बार गड़बड़ी या चोरी की घटनाएं हुईं। जांच में यह भी सामने आया कि 24 अप्रैल से पहले की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे जांच एजेंसियों के सामने कई नए सवाल खड़े हो गए हैं।

एफआईआर में देरी पर उठे सवाल

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि ट्रस्ट को मई के अंत तक चोरी की जानकारी मिल गई थी और 5 जून को छापेमारी भी की गई, तो तत्काल पुलिस में एफआईआर क्यों दर्ज नहीं कराई गई। ट्रस्ट की ओर से औपचारिक शिकायत 24 जून को दर्ज कराई गई, जिसके बाद पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया।

जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगा रही हैं कि चोरी की रकम किन-किन बैंक खातों में पहुंची और क्या किसी ने डिजिटल साक्ष्य मिटाने या रकम छिपाने का प्रयास किया था।

पुलिस और ट्रस्ट दोनों जांच के दायरे में

मामले में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि 5 जून को छापेमारी के बावजूद मुकदमा दर्ज करने में देरी हुई। विपक्ष ने इस पूरे मामले को लेकर ट्रस्ट और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

चंपत राय क्यों हैं चर्चा में?

राम जन्मभूमि आंदोलन से लेकर मंदिर निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा तक चंपत राय की अहम भूमिका रही है। उन्हें ट्रस्ट का सबसे प्रभावशाली पदाधिकारी माना जाता रहा है। ऐसे में इस मामले में उनका नाम सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।

6 जुलाई की बैठक पर नजर

अब सभी की निगाहें 6 जुलाई को होने वाली श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक पर टिकी हैं। इस बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्र के इस्तीफों पर फैसला लिया जाएगा। वहीं एसआईटी अपनी अंतिम रिपोर्ट भी जल्द उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप सकती है।

फिलहाल जांच जारी है और यह स्पष्ट होना बाकी है कि यह मामला केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा संगठित नेटवर्क सक्रिय था।

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