होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और प्रतिबंधों में ढील पर अमेरिका-ईरान समझौते के संकेत

होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और प्रतिबंधों में ढील पर अमेरिका-ईरान समझौते के संकेत

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को समाप्त करने तथा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सामान्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति के संकेत मिले हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दोनों देशों के बीच एक रूपरेखा समझौते (फ्रेमवर्क एग्रीमेंट) पर सहमति बनने की संभावना जताई जा रही है, जिसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोला जा सकता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रस्तावित समझौते में ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को समुद्री यातायात के लिए खोलना प्रमुख शर्तों में शामिल है। इसके बदले अमेरिका ईरान पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में ढील देने और अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को नरम करने पर विचार कर सकता है।

अगले चरण में हटाई जाएंगी समुद्री बारूदी सुरंगें

अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि जलडमरूमध्य खुलने और समुद्री यातायात बहाल होने के बाद अगले चरण में क्षेत्र में बिछाई गई समुद्री बारूदी सुरंगों (माइंस) को हटाने का कार्य शुरू किया जाएगा। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है होर्मुज

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में गिना जाता है। खाड़ी देशों से निर्यात होने वाले तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से विश्व बाजार तक पहुंचता है। हाल के महीनों में क्षेत्रीय तनाव के कारण इस मार्ग की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं।

समुद्री सुरक्षा बहाल करना प्रमुख लक्ष्य

प्रस्तावित समझौते का उद्देश्य केवल समुद्री मार्ग को खोलना नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय जहाजों की निर्बाध और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना भी है। इसके तहत सुरक्षा जोखिमों को कम करने और व्यापारिक गतिविधियों को सामान्य बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

ट्रंप और शहबाज शरीफ ने जताई उम्मीद

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत देते हुए कहा है कि इस पर जल्द हस्ताक्षर हो सकते हैं। वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी दावा किया है कि अगले 24 घंटों में समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि समझौते पर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से हस्ताक्षर कराने की तैयारी चल रही है। इसके बाद तकनीकी स्तर की बैठकों में समझौते के क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।

यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो इससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों में स्थिरता आने और मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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