कोटा जिले में सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की मौत का मामला लगातार बढ़ता जा रहा है। देर रात एक और प्रसूता की इलाज के दौरान मौत हो गई। हालत गंभीर होने पर उसे जेके लोन अस्पताल से न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया था, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
जानकारी के अनुसार श्रीरामनगर निवासी पिंकी को 7 मई को डिलीवरी के लिए जेके लोन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसी रात उसका सिजेरियन ऑपरेशन किया गया, जिसमें उसने एक बच्ची को जन्म दिया। परिजनों का कहना है कि डिलीवरी के कुछ समय बाद ही पिंकी की तबीयत बिगड़ने लगी। आरोप है कि लगातार दो दिनों तक उसकी हालत खराब रही, लेकिन उसे बेहतर इलाज के लिए समय पर रेफर नहीं किया गया।
परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन ने मामले को दबाने की कोशिश की। उनका कहना है कि पिंकी का यूरिन आना बंद हो गया था और उसका ब्लड प्रेशर भी लगातार कम हो रहा था। इसके बाद उसे जेके लोन अस्पताल के आईसीयू में शिफ्ट किया गया। जब हालत ज्यादा गंभीर हो गई तो अस्पताल प्रशासन ने उसे न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया।

परिजनों के मुताबिक ऑपरेशन के बाद पिंकी को वेंटिलेटर पर रखा गया था, लेकिन वह बेहोशी की हालत में थी। आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने उसे होश में लाने की सही कोशिश नहीं की। बताया जा रहा है कि अन्य दो महिलाओं को एसएसबी ब्लॉक में शिफ्ट किया गया था, लेकिन पिंकी महावर को आईसीयू में ही रखा गया और मामले की जानकारी बाहर नहीं आने दी गई।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि जब पिंकी की हालत ज्यादा बिगड़ गई तो उसे अस्पताल के पिछले दरवाजे से न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया। इससे परिवार को शक है कि अस्पताल प्रशासन मामले को छिपाने की कोशिश कर रहा था। घटना के बाद परिजनों में भारी नाराजगी है। परिवार का कहना है कि जब तक मौत का स्पष्ट कारण सामने नहीं आएगा, तब तक वे पिंकी का शव नहीं लेंगे। मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।








