संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र के दूसरे शुक्रवार की शाम को केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह के संबोधन के बाद सदन में महिला आरक्षण विधेयक (संविधान 131वां संशोधन विधेयक, 2026) को लेकर वोटिंग हुई. इसमें सरकार को विपक्ष का साथ नहीं मिला, और बिल पास नहीं हो सका. कुल 528 वोट में इस बिल के समर्थन में 298 वोट पड़े तो विपक्ष में 230 वोट पड़े. यानी जरूरत के आंकड़े हासिल करने में 54 वोट कम पड़ गए.
अब ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बहुमत से ज्यादा पक्ष में पड़े वोट के बाद भी बिल लोकसभा में क्यों नहीं पास हो सका है. इधर, संसदीय कार्यमंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि विपक्ष ने साथ नहीं दिया, आपने एक मौका गंवा दिया है, महिला को सम्मान देने का अभियान जारी रहेगा, दे कर रहेंगे
यह पहली बार है, जब सदन में पीएम मोदी सरकार को बड़ा झटका लगा है. सरकार पहली बार किसी बिल को सदन में पास नहीं करा सकी है. इसके पीछे न तो बहुमत है, और न ही कोई राजनीतिक बंदिश, बल्कि संविधान में दिए जरूरी निर्देश हैं.
सरकार का इस बिल को लाने के पीछे मकसद देश की आधी आबादी यानी महिला वर्ग को सदन में 33 प्रतिशत आरक्षण देना था. साथ ही 2029 में इसके जरिए सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करना था. विपक्षी पार्टियों ने इसे संघीय अधिकारों की रक्षा की जरूरत का हवाला देते हुए इस विधेयक का विरोध किया था

आइए समझते हैं कि बिल पास क्यों नहीं हो सका है?
सरकार को अगर संविधान में संशोधन कराना था, तो देश के दोनों सदन में दो तिहाई सदस्यों के समर्थन की जरूरत थी. संविधान के आर्टिकल 368 के तहत संविधान संशोधन विधेयकों को पास कराने के लिए शर्त तय की गई है. इस तरह के विधेयकों को मंजूरी तभी मिलती है, जब दोनों सदनों में विशेष बहुमत हासिल हो. मतलब कुल सदस्य की संख्या के बहुमत का आंकड़ा होना जरूरी है. इसके अलावा सदन में मौजूद सदस्यों का दो तिहाई समर्थन होना भी जरूरी है. साथ ही राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजने से पहले विधानसभाओं में इनकी पुष्टी होना भी जरूरी है
प्रियंका बोलीं- पुरानी जनणना पर गलत था आरक्षण
लोकसभा में बिल के गिरने के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सरकार पर बड़ा हमला बोला. उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए साफ कहा कि उनकी पार्टी महिलाओं को आरक्षण देने के खिलाफ नहीं है, लेकिन जिस तरीके से इस बिल को लागू करने की कोशिश की जा रही थी, वह स्वीकार्य नहीं है.
प्रियंका ने आगे कहा कि पुरानी जनगणना के आधार पर परिसीमन (Delimitation) करके महिला आरक्षण लागू करना गलत है, खासकर तब जब इसमें ओबीसी (OBC) वर्ग को शामिल नहीं किया गया. उनके मुताबिक, इस वजह से कांग्रेस इस बिल का समर्थन नहीं कर सकती थी. प्रियंका गांधी ने इसे लोकतंत्र और देश की एकता के लिए “बड़ी जीत” बताते हुए कहा कि यह विधेयक संविधान की मूल भावना के खिलाफ था
उन्होंने आरोप लगाया कि यह सिर्फ महिला सशक्तिकरण का मुद्दा नहीं था, बल्कि इसके जरिए राजनीतिक ढांचे में बदलाव की कोशिश की जा रही थी. कांग्रेस सांसद ने यह भी कहा कि संसद के अंदर उन्होंने पहले ही इसे “संविधान पर हमला” बताया था, और अब इसके पास न होने को उन्होंने सकारात्मक परिणाम बताया
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि संशोधन विधेयक गिर गया. उन्होंने महिलाओं के नाम पर, संविधान को तोड़ने के लिए, असंवैधानिक तरकीब का इस्तेमाल किया. भारत ने देख लिया. INDIA ने रोक दिया.
गृहमंत्री अमित शाह ने इस बिल के गिर जाने पर कहा कि लोकसभा में बहुत अजीब दृश्य दिखा. नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए जरूरी संविधान संशोधन बिल को कांग्रेस, TMC, DMK और समाजवादी पार्टी ने पारित नहीं होने दिया. महिलाओं को 33% आरक्षण देने के बिल को गिरा देना, उसका उत्साह मनाना और जयनाद करना सचमुच निंदनीय और कल्पना से परे है
अमित शाह बोले- आज लोकसभा में अजीब दृश्य दिखा
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने बिल गिरने के पर जाहिर की निराशा
सोशल मीडिया पर रक्षामंत्री ने एक लंबा चौड़ा पोस्ट लिखकर भावनात्मक निराशा व्यक्त की. साथ ही देश के लोकतंत्र के इतिहास में इस दिन को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है











