जयपुर, 29 मार्च। जालोर शहर स्थित नंदीश्वरदीप जैन तीर्थ परिसर में रविवार को लोकतंत्र सेनानी-स्वर्ण जयंती सम्मेलन का आयोजन किया गया।
पशुपालन एवं गोपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि वर्ष 1975 में लागू किए आपातकाल के दौरान उत्पन्न हुई विषम परिस्थितियों में नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए एवं प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई लेकिन ऐसे कठिन समय में भी लोकतंत्र सेनानियों ने अपने संघर्ष को जारी रखा और लोकतंत्र की ज्योति को प्रज्वलित रखा। लोकतंत्र सेनानियों का साहस और बलिदान देश के इतिहास में हमेशा स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा एवं उनका समर्पण और त्याग आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा राजस्थान लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि अधिनियम के तहत लोकतंत्र सेनानियों को 20 हजार रुपये मासिक पेंशन और 4 हजार रुपये की मासिक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। गर्ग ने आपातकाल के संघर्षों-अनुभव को साझा करते हुए आपातकाल के विरुद्ध लोकतांत्रिक आदर्शों की रक्षा के यज्ञ रूप में याद करने की बात कही।
कार्यक्रम को राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत, जालोर सांसद लुम्बाराम चौधरी, आहोर विधायक छगन सिंह राजपुरोहित, सिविल लाइन्स विधायक, जयपुर गोपाल शर्मा ने भी संबोधित करते हुए भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के मूल्यों, परम्परा, आपातकाल के प्रभाव और नागरिक स्वतंत्रता पर विचार व्यक्त किए।
लोकतंत्र सेनानी व वरिष्ठ अधिवक्ता मधुसूदन व्यास ने आपातकाल के दिनों को याद करते हुए लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष, लोकतंत्र को बचाने के लिए किए प्रयासों के वृतांत और अनुभव भी साझा किए। कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानियों एवं उनके आश्रितों को शॉल व स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर लोकतंत्र सेनानी कैलाश सोनी, बंशीसिंह चौहान, गेनाराम मेघवाल, हरिशंकर राजपुरोहित, भगाराम सुथार, सूरजप्रकाश व्यास, मिश्री बाई पत्नी लोकतंत्र सेनानी स्व. चम्पालाल मुणोत, रवि सोलंकी, दीपसिंह धनानी, महेन्द्र मुणोत, सुरेश सोलंकी सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।











