जयपुर, 2 मार्च। वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)संजय शर्मा ने सोमवार को अलवर जिले के राजकीय राजीव गांधी सामान्य चिकित्सालय के पैथोलॉजी विभाग में फाइन निडल एस्पाइरेशन साइटोलॉजी (एफएनएसी) केंद्र का उद्घाटन कर कैंसर एवं अन्य रोगों की जांच सेवा का विधिवत शुभारंभ किया।
वन राज्यमंत्री शर्मा ने कहा कि जिला अस्पताल में इस आधुनिक तकनीक के आने से अलवर की गरीब और मध्यम वर्गीय जनता को बहुत बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि मरीजों को अब अस्पताल में ही कैंसर और गांठों की जांच की सुविधा मिलेगी तथा जांच के लिए निजी सेंटरों पर हजारों रुपए खर्च नहीं करने पड़ेंगे। जिला अस्पताल में यह सुविधा शुरू होने से अलवर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को सीधा फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार चिकित्सा तंत्र को मजबूती प्रदान करने एवं मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से निरन्तर काम कर रही है। राज्य सरकार द्वारा अपने तीनों बजटों में जिले की चिकित्सा सुविधाओं में विस्तार करते हुए सभी क्षेत्रों के लिए विशेष सौगातें दी है। इसके उपरान्त वन राज्यमंत्री ने अपने दैनिक पौधारोपण के संकल्प के तहत पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील चौहान ने बताया कि एफएनएसी कैंसर व अन्य रोगों की जांच के लिए सरल एवं सुरक्षित व महत्वपूर्ण जांच विधि है। इसमें बहुत ही पतली सुई की मदद से गांठ से कोशिकाएं निकाली जाती है तथा इसमें चीरा नहीं लगाया जाता है, इसलिए टांके की आवश्यकता भी नहीं होती है और न ही मरीजों को भर्ती होने की आवश्यकता पडेगी। राजकीय मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. इन्दु सूद ने बताया कि अस्पताल का लक्ष्य मरीजों को सभी उच्च स्तरीय डायग्नोस्टिक सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराना है और एफएनएसी केंद्र की स्थापना इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।
जनता के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह सुविधा
पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष मीणा ने बताया कि एफएनएसीएक अत्यंत सरल और प्रभावी जांच पद्धति है। इसके माध्यम से शरीर के किसी भी हिस्से में होने वाली गांठ (जैसे स्तन, गले की गांठ, थायराइड या लिम्फ नोड) की जांच केवल एक बारीक सुई द्वारा की जाती है।
मरीजों को होने वाले प्रमुख लाभ
यह तकनीक शरीर में पनप रहे कैंसर का शुरुआती दौर में ही सटीक पता लगाने में सक्षम है, जिससे समय पर इलाज संभव हो सकेगा, इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की चीर-फाड़ या सर्जरी की जरूरत नहीं होती और मरीज को अस्पताल में भर्ती भी नहीं होना पड़ता, स्थानीय स्तर पर जांच होने से मरीजों को रिपोर्ट के लिए अब जयपुर या दिल्ली के चक्कर नहीं काटने होंगे ।
इस अवसर पर पैथोलॉजी विभाग के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. नील शर्मा, डॉ. सुमन मीणा, डॉ. शिल्पा छाबड़ा, डॉ. रेनू राठौड़ सहित प्रबुद्ध व्यक्ति एवं चिकित्सालय स्टाफ भी मौजूद रहा।












