भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच की फ्री ट्रेड डील फाइनल हो गई है. ऐसे में अब ये सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इस डील से भारत और यूरोपीय यूनियन में से कौन सबसे ज्यादा फायदे में है इस डील के जरिए भारत और यूरोपियन यूनियन दोनों ने अपने-अपने लिए नए बाजार तलाश लिए हैं अगर भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच हुई इस ट्रेड डील को दोनों तरफ से मदर ऑफ ऑल डील्स कहा जा रहा है तो जाहिर है कि फायदा तो दोनों का ही होगा. हालांकि अभी तक की जो स्थिति है, उसमें इस डील का फायदा भारत से ज्यादा यूरोपियन यूनियन को दिख रहा है. हालांकि भारत को इससे अभी तक कोई खास नुकसान भी नहीं है
भारत के फायदे?
ये डील भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच की है, लेकिन यूरोपियन यूनियन कोई एक देश नहीं है, बल्कि 27 देशों का एक समूह है. इस लिहाज से भारत को जो नया बाजार मिला है वो कोई एक देश नहीं, बल्कि 27 देशों का बाजार है. इस लिहाज से भारत को फायदा ही फायदा है. फिर भी अगर आंकड़ों में बात करें तो अभी तक भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच का कुल कारोबार 190 बिलियन डॉलर से अधिक का है.
इसमें मर्चेंडाइज सेक्टर का ट्रेड करीब 136.53 बिलियन डॉलर का है. इसमें भी भारत का एक्सपोर्ट करीब $75.85 बिलियन है, जबकि इंपोर्ट करीब $60.68 बिलियन का. यानी कि अभी इस ट्रेड डील के बिना भी भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच जो कारोबार हो रहा था, उसमें भारत ट्रेड सरप्लस में था. यानी कि बेचता ज्यादा था और खरीदता कम था. ये सब तब था और है जब ये ट्रेड डील लागू नहीं हुई है.
जब ट्रेड डील लागू हो जाएगी तो भारत यूरोपियन यूनियन को जितना भी सामान बेचता था उनमें से 99 फीसदी सामान को यूरोपियन बाजार में ड्यूटी फ्री एक्सेस मिलेगा. इसकी वजह से भारत का कपड़ा हो या फिर चमड़ा, ज्वेलरी हो या पर्ल्स, सब यूरोपियन बाजार में सस्ते होंगे. क्योंकि अभी तक ऐसे सामान पर 10 से 12 फीसदी की ड्यूटी लगती थी. ट्रेड डील के बाद ड्यूटी जीरो हो जाएगी तो यूरोपीय बाजार में भारत का सामान सस्ता हो जाएगा. बाकी स्मार्टफोन, दवाएं, इंजीनियरिंग सामान, जूते, रिफाइंड ऑयल और तराशे हुए हीरे, सबके लिए बाजार और भी बड़ा हो जाएगा.
इससे भारतीय सामान की यूरोपियन बाजार में डिमांड बढ़ेगी और इसकी वजह से भारत का यूरोपियन बाजार में एक्सपोर्ट बढ़ेगा. सर्विस सेक्टर की बात करें तो अभी भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच सर्विस सेक्टर का कुल कारोबार करीब 83 बिलियन डॉलर का है. ट्रेड डील के लागू होने के बाद ये कारोबार और भी बड़ा होगा क्योंकि तब भारतीय पेशेवरों के लिए यूरोप में काम करना आसान हो जाएगा. यानी कि इस डील की वजह से भारतीयों के पास रोजगार के अवसर बढ़ जाएंगे
यूनियन के फायदे
इस डील से यूरोपियन यूनियन को सबसे बड़ा फायदा तो यही है कि उसे भारत जैसा एक बड़ा बाजार मिल जाएगा, जिसकी जनसंख्या पूरे यूरोपिनयन यूनियन की करीब-करीब दोगुनी है. जहां यूरोपियन यूनियन की कुल आबादी करीब 74 करोड़ है, वहीं भारत की कुल आबादी करीब 140 करोड़ है तो सबसे बड़ा फायदा तो यही होने वाला है इस डील से यूरोपियन यूनियन को. बाकी भारत के लोगों में विदेश के ब्रांड को लेकर जो क्रेज है, उसको देखकर तो यही लगता है कि यूरोपियन यूनियन को इस डील से बड़ा फायदा होने वाला है.
इस डील के बाद यूरोपीय कारें जैसे मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू, फॉक्स वैगन भारत में और भी सस्ती हो जाएंगी. पहले इन कारों पर ड्यूटी 110 फीसदी की थी या कहिए कि इन कारों का भारत में बाजार सीमित है. विदेशी कारें महज 3 फीसदी तक ही हैं. हालांकि प्रीमियम कारों में यूरोपीय कारों का ही दबदबा है, लेकिन जब डील लागू होने के बाद ड्यूटी 10 फीसदी तक रह जाएगी तो बाजार बड़ा होगा और कम से कम हर साल भारत में वो 2 लाख 50 हजार यूरोपीय कारें तो आएंगी ही आएंगी, जिन्हें डील के तहत छूट मिली है.
बाकी भारत के लोग विदेशी शराब के भी शौकीन हैं. करीब एक करोड़ लोग लोग विदेशी शराब पीते हैं. अब भी इन विदेशी शराब में सबसे ज्यादा हिस्सा यूरोपियन देशों का ही है. अब अगर इन विदेशी शराब या वाइन, व्हिस्की और बीयर पर टैक्स की कटौती होगी तो विदेशी शराब का बाजार और भी बड़ा होगा.
डील के तहत भारत इंपोर्ट ड्यूटी खत्म करेगा या फिर कम करेगा तो विदेश से आने वाली मशीनरी, केमिकल्स और मेडिकल इक्वीपमेंट्स का इंपोर्ट बढ़ जाएगा. भारत के सस्ते कच्चे माल और सस्ते कुशल मजदूरों की पूरी दुनिया में डिमांड है. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से यूरोप ये दोनों ही चीजें भारत से ले जाएगा और उनका इस्तेमाल अपनी महंगी मैन्युफैक्चरिंग में करेगा. इस डील के बाद से ही यूरोपियन यूनियन की ओर से कहा जा रहा है कि साल 2032 तक यूरोपियन यूनियन का भारत में एक्सपोर्ट दोगुना हो जाएगा और इसकी वजह से यूरोपियन यूनियन के पास करीब 8 लाख नई नौकरियां होंगी












