Jaisalmer News: ‘चादर महोत्सव’ 872 वर्ष पुराने पवित्र वस्त्रों के दर्शन का दुर्लभ अवसर, सोनार किले से निकला वरघोड़ा, देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु

Jaisalmer News: ‘चादर महोत्सव’ 872 वर्ष पुराने पवित्र वस्त्रों के दर्शन का दुर्लभ अवसर, सोनार किले से निकला वरघोड़ा, देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु

जैसलमेर में जैन समाज का अनूठा और ऐतिहासिक आयोजन ‘चादर महोत्सव’ पहली बार भव्य स्तर पर आयोजित किया जा रहा है। इस महोत्सव ने धार्मिक आस्था, परंपरा और इतिहास को एक साथ जीवंत कर दिया है। जैन समाज के लिए यह आयोजन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें जैन संत दादागुरु श्री जिनदत्त सूरी महाराज के लगभग 872 वर्ष पुराने पवित्र वस्त्रों के दर्शन का दुर्लभ अवसर मिल रहा है। विशेष बात यह है कि ये पवित्र वस्त्र करीब 144 साल बाद पहली बार लोगों के दर्शन के लिए बाहर लाए गए हैं। इसके चलते पूरे जैसलमेर शहर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला

ऐतिहासिक सोनार किले से एक भव्य शोभायात्रा (वरघोड़ा) निकाली गई। इस शोभायात्रा में पारंपरिक वाद्य यंत्रों, बैंड-बाजों और संतों के सान्निध्य में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने पूरे मार्ग में भक्ति गीतों और जयकारों के साथ वातावरण को भक्तिमय बना दिया। यह शोभायात्रा सोनार किले से निकलकर शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई पहले गड़ीसर तालाब पहुंची और इसके बाद देदांसर मैदान स्थित महोत्सव स्थल तक पहुंची। रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर इस ऐतिहासिक क्षण का स्वागत किया।

चादर महोत्सव में 871 वर्ष पुरानी आस्था का अद्भुत दृश्य: 150 साल बाद ज्ञान  भंडार से बाहर आई दादागुरुदेव की पवित्र चादर, सोनार दुर्ग से निकला ...

पवित्र चादर को किले से विशेष सम्मान के साथ बाहर लाया गया। पहले श्रद्धालुओं ने इसे सिर पर धारण कर बाहर निकाला, इसके बाद कांच के विशेष केस में सुरक्षित रखकर विंटेज कार के माध्यम से शोभायात्रा के साथ महोत्सव स्थल तक पहुंचाया गया। देदांसर ग्राउंड में महोत्सव स्थल को भव्य रूप से सजाया गया है। यहां एक विशेष रथ तैयार किया गया है, जिसकी आकृति पानी के जहाज के समान बनाई गई है। इसी रथ में पवित्र चादर को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए स्थापित किया गया है।

महोत्सव स्थल पर परंपराओं के अनुसार चादर का विधिवत अभिषेक किया जाएगा। इस दौरान संतों के सान्निध्य में धार्मिक अनुष्ठान और विशेष प्रार्थनाएं भी आयोजित होंगी। चादर महोत्सव के दौरान एक और महत्वपूर्ण धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें देश और विदेश से जुड़े श्रद्धालु मिलकर दादागुरु इकतीसा का 1 करोड़ 8 लाख सामूहिक पाठ करेंगे। इसे जैन समाज के धार्मिक इतिहास का एक बड़ा आध्यात्मिक आयोजन माना जा रहा है।

दादा गुरुदेव चादर महोत्सव: वरघोड़ा निकाला, 150 वर्ष बाद ज्ञान भंडार से बाहर  आई पवित्र चादर

872 साल पुरानी परंपरा 

जैसलमेर जैन ट्रस्ट के अध्यक्ष महेंद्र सिंह भंसाली ने बताया कि इस पवित्र चादर का इतिहास लगभग 872 वर्ष पुराना है। ऐतिहासिक मान्यता के अनुसार विक्रम संवत 1211 में अजमेर में दादागुरु श्री जिनदत्त सूरी महाराज का स्वर्गवास हुआ था। अंतिम संस्कार के दौरान उनका शरीर अग्नि में विलीन हो गया लेकिन उनके वस्त्र सुरक्षित रह गए। बाद में इन पवित्र वस्त्रों को गुजरात के पाटन में सुरक्षित रखा गया। लगभग 145 वर्ष पहले, जब जैसलमेर में भीषण महामारी फैली थी, तब तत्कालीन महारावल ने इन वस्त्रों को पाटन से जैसलमेर मंगवाया था।

चादर महोत्सव में 871 वर्ष पुरानी आस्था का अद्भुत दृश्य: 150 साल बाद ज्ञान  भंडार से बाहर आई दादागुरुदेव की पवित्र चादर, सोनार दुर्ग से निकला ...

इतिहासकारों और जैन समाज की मान्यताओं के अनुसार जब ये पवित्र वस्त्र जैसलमेर लाए गए, उसके बाद शहर में फैली महामारी धीरे-धीरे समाप्त हो गई। इसे एक चमत्कारिक घटना माना गया और तभी से इन वस्त्रों को जैसलमेर किले के जैन मंदिर स्थित  ज्ञान भंडार में सुरक्षित रखा गया।

जैन समाज के इतिहास में पहली बार इस तरह का चादर महोत्सव आयोजित किया जा रहा है, जिसमें इतने बड़े स्तर पर इन पवित्र वस्त्रों को सार्वजनिक दर्शन के लिए रखा गया है। इस ऐतिहासिक आयोजन को देखने और इसमें शामिल होने के लिए देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु जैसलमेर पहुंचे हैं। इस भव्य शोभायात्रा में जैन समाज के साथ-साथ स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। पूरे शहर में श्रद्धा, भक्ति और उत्सव का अनोखा संगम देखने को मिला और जैसलमेर इन दिनों आध्यात्मिक ऊर्जा व धार्मिक उल्लास से सराबोर नजर आ रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *