सुमेरपुर में अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर सियासी खींचतान तेज, 21 सितंबर को होगा फैसला

सुमेरपुर में अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर सियासी खींचतान तेज, 21 सितंबर को होगा फैसला

भाजपा के पास 19 पार्षदों के साथ बहुमत, कांग्रेस के पास 9 और 7 निर्दलीय; चत्रभुज शर्मा और सुभाष मेवाड़ा आमने-सामने

सुमेरपुर। नगर पालिका चुनाव के पार्षदों के नतीजे सामने आने के बाद अब सुमेरपुर की राजनीति का अगला केंद्र अध्यक्ष की कुर्सी बन गई है। 35 वार्डों वाली नगर पालिका में भाजपा ने 19, कांग्रेस ने 9 और निर्दलीय प्रत्याशियों ने 7 सीटों पर जीत दर्ज की है। बहुमत के लिए 18 पार्षदों की जरूरत है।

पार्षद चुनाव समाप्त होते ही दोनों प्रमुख दलों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए दावेदारियों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं। भाजपा के भीतर अध्यक्ष पद के लिए कई नामों की चर्चा पहले से होती रही है। स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में चत्रभुज शर्मा समेत कई नाम सामने आए थे।

इसी बीच अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर राजनीतिक समीकरणों में संभावित फेरबदल की चर्चाएं भी सामने आईं। कुछ राजनीतिक चर्चाओं में पार्षदों के पाला बदलने और निर्दलीय उम्मीदवारों के जरिए समीकरण बदलने की बातें कही गईं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अलग-अलग स्तर पर होना बाकी है।

अध्यक्ष पद के नामांकन के दौरान रमेश राखेचा के निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में सामने आने की भी चर्चा रही। बाद में उनका नामांकन वापस होने के बाद मुकाबले की तस्वीर बदल गई। एक स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार अध्यक्ष पद के लिए चार नामांकन दाखिल हुए थे, जिनमें भाजपा से चत्रभुज शर्मा, कांग्रेस से सुभाष मेवाड़ा, निर्दलीय रमेश राखेचा और एक अन्य प्रत्याशी शामिल थे। बाद में मुकाबला दो प्रमुख उम्मीदवारों तक सिमट गया।

अब मुकाबला दो चेहरों के बीच

अब अध्यक्ष पद के लिए भाजपा के चत्रभुज शर्मा और कांग्रेस के सुभाष मेवाड़ा मैदान में हैं। सुमेरपुर की राजनीति में चत्रभुज शर्मा का नाम नया नहीं है। वे पहले नगर पालिका के उपाध्यक्ष रह चुके हैं और इस चुनाव में वार्ड 23 से भाजपा के प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज कर चुके हैं।

दूसरी ओर कांग्रेस की तरफ से सुभाष मेवाड़ा अध्यक्ष पद की दौड़ में हैं। मेवाड़ा सुमेरपुर कांग्रेस संगठन से भी जुड़े रहे हैं और हालिया चुनावी प्रक्रिया में नगर कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका सामने आई थी।

बहुमत भाजपा के पास, फिर भी नजर निर्दलीयों पर

संख्याबल के लिहाज से भाजपा के पास 19 पार्षद हैं, जो 18 के बहुमत आंकड़े से एक अधिक है। कांग्रेस के पास 9 और निर्दलीयों के पास 7 पार्षद हैं।

इसके बावजूद अध्यक्ष चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां इसलिए महत्वपूर्ण हो गई हैं क्योंकि अध्यक्ष का चुनाव जनता सीधे नहीं करती, बल्कि निर्वाचित पार्षद मतदान करके अध्यक्ष चुनते हैं।

स्थानीय राजनीतिक हलकों में अलग-अलग दावे और कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि चत्रभुज शर्मा के अनुभव और भाजपा के संख्याबल से समीकरण स्पष्ट हैं, जबकि कांग्रेस समर्थक खेमे की ओर से अलग राजनीतिक समीकरण बनने की चर्चाएं हैं। इन दावों का वास्तविक परिणाम 21 सितंबर को होने वाले मतदान के बाद ही सामने आएगा।

अब 21 सितंबर का इंतजार

सुमेरपुर नगर पालिका की अध्यक्ष पद की कुर्सी पर कौन बैठेगा, इसका फैसला अब 21 सितंबर को होगा। फिलहाल आंकड़ों में भाजपा के पास बहुमत है, लेकिन अध्यक्ष चुनाव में अंतिम तस्वीर मतदान के बाद ही स्पष्ट होगी।

सुमेरपुर में सवाल अब सिर्फ अध्यक्ष कौन बनेगा, इतना नहीं है—सवाल यह भी है कि 19 बनाम 9 और 7 के इस संख्याबल के बीच क्या कोई नया राजनीतिक समीकरण सामने आता है? फैसला 21 सितंबर को होगा।

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