सुमेरपुर पालिका अध्यक्ष चुनाव से पहले नामांकन जांच पर सवाल

सुमेरपुर पालिका अध्यक्ष चुनाव से पहले नामांकन जांच पर सवाल

सुमेरपुर। नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले भाजपा के चत्रभुज शर्मा के नामांकन से जुड़े दस्तावेजों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। उपलब्ध दस्तावेजों की तुलना करने पर कृषि भूमि, आवासीय भवन, आय और चल संपत्ति से संबंधित कई प्रविष्टियां ऐसी दिखाई देती हैं, जिन पर निर्वाचन कार्यालय की नामांकन जांच को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

कृषि भूमि के विवरण में 0.80 हेक्टेयर की प्रविष्टि पर सवाल

दस्तावेज में कृषि भूमि के विवरण में 0.80 हेक्टेयर की प्रविष्टि दिखाई देती है। उपलब्ध रिकॉर्ड की तुलना में इसी कृषि भूमि संबंधी विवरण में 0.80 हेक्टेयर की प्रविष्टि दो बार दर्ज होने का सवाल सामने आता है। ऐसे में सवाल यह है कि उम्मीदवार की कुल कृषि भूमि कितनी मानी गई और स्क्रूटिनी के दौरान इस विवरण का मिलान किस तरह किया गया।

भाजपा के चत्रभुज शर्मा के दस्तावेजों में अलग-अलग प्रविष्टियां, 0.80 हेक्टेयर की जानकारी दोहराई गई? आय और संपत्ति विवरण में भी अंतर

पते वाले कॉलम में भी सवाल

आवासीय भवन की तालिका में “Location and Address” और क्षेत्रफल के लिए अलग-अलग कॉलम हैं। दस्तावेज में भवन का क्षेत्रफल 3200 वर्ग फीट दिखाई देता है, जबकि Location/Address वाले विवरण को लेकर अलग प्रविष्टि दिखाई देती है। सवाल यह है कि निर्धारित कॉलम में दर्ज जानकारी की जांच किस आधार पर की गई।

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आय में ₹2 लाख का अंतर

स्वयं की आय के विवरण में भी अंतर दिखाई देता है। एक दस्तावेज में ₹14 लाख, जबकि दूसरे में ₹12 लाख दर्ज है। वहीं पति/पत्नी की आय ₹10 लाख और आश्रितों की आय ₹3 लाख दिखाई देती है।

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आश्रित-1 की संपत्ति में भी अंतर

चल संपत्ति के विवरण में एक दस्तावेज में आश्रित-1 के सामने शून्य, जबकि दूसरे दस्तावेज में ₹2.70 लाख की प्रविष्टि दिखाई देती है। यह अंतर भी नामांकन दस्तावेजों की जांच के दौरान स्पष्ट किए जाने योग्य है।


‘गो भक्त सेवा’ वाला उदाहरण भी सवाल खड़ा करता है

नामांकन प्रक्रिया को लेकर उपलब्ध एक अन्य उम्मीदवार के पुराने शपथपत्र में “पेशा/व्यवसाय” और “आय के स्रोत” दोनों जगह “गो भक्त सेवा” लिखा हुआ दिखाई देता है। उसी दस्तावेज में उम्मीदवार ने अपनी चल-अचल संपत्तियों का भी विवरण दिया है।

यह दस्तावेज चत्रभुज शर्मा का नहीं है और इसका उल्लेख केवल एक उदाहरण के रूप में किया जा रहा है। सवाल यह है कि जब किसी उम्मीदवार के शपथपत्र में संपत्ति का विस्तृत विवरण मौजूद हो, तो पेशा और आय के स्रोत से संबंधित प्रविष्टियों की पर्याप्तता और स्पष्टता की जांच निर्वाचन अधिकारी किस स्तर पर करते हैं?


अब सवाल निर्वाचन अधिकारी से

मामला किसी एक उम्मीदवार को दोषी ठहराने का नहीं, बल्कि नामांकन जांच की पारदर्शिता का है।

सवाल सीधे हैं—

  • दस्तावेजों में दिखाई दे रही अलग-अलग प्रविष्टियों की जांच कैसे हुई?
  • ₹14 लाख और ₹12 लाख की आय में अंतर का कारण क्या है?
  • आश्रित-1 की संपत्ति एक दस्तावेज में शून्य और दूसरे में ₹2.70 लाख कैसे हुई?
  • कृषि भूमि के विवरण में 0.80 हेक्टेयर की प्रविष्टि दो बार क्यों दिखाई देती है?
  • Location/Address और क्षेत्रफल वाले कॉलम में दर्ज जानकारी की जांच हुई या नहीं?
  • क्या इन प्रविष्टियों पर उम्मीदवार से कोई स्पष्टीकरण लिया गया?
  • और यदि लिया गया तो नामांकन स्वीकार करने का आधार क्या रहा?

सुमेरपुर नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव से पहले ये सवाल इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि अब मुकाबला केवल चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं, बल्कि नामांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है।

नोट: खबर में “SDM ने गलती की”, “उम्मीदवार ने जानबूझकर गलत जानकारी दी” जैसे निष्कर्ष नहीं लगाए गए हैं। दस्तावेजों में दिखाई दे रही प्रविष्टियों के आधार पर निर्वाचन अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है।

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