नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों ने नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 को अपनाया। घोषणापत्र में वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार, बहुपक्षीय सहयोग और ग्लोबल साउथ की भूमिका बढ़ाने के साथ 1955 के बांडुंग सम्मेलन के सिद्धांतों का भी उल्लेख किया गया है। इसी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर राजनीतिक तंज कसा है।
कांग्रेस महासचिव और संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए घोषणापत्र के पैरा 16 को सामने रखते हुए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने इसके साथ बॉलीवुड के मशहूर गीत ‘तू जहां-जहां चलेगा, मेरा साया साथ होगा’ का संदर्भ देते हुए मोदी सरकार पर कटाक्ष किया।
नई दिल्ली घोषणापत्र के पैरा 16 में 1955 के बांडुंग सम्मेलन और उसके सिद्धांतों का उल्लेख होने के बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने नेहरू की कूटनीतिक विरासत का जिक्र करते हुए केंद्र पर निशाना साधा।
घोषणापत्र के पैरा 16 में क्या है?
नई दिल्ली घोषणापत्र के पैरा 16 में 1955 में इंडोनेशिया के बांडुंग में आयोजित एशियन-अफ्रीकन कॉन्फ्रेंस का उल्लेख है।
घोषणापत्र में कहा गया है कि बांडुंग सम्मेलन में समानता, स्वतंत्रता, गैर-हस्तक्षेप और पारस्परिक लाभ जैसे सिद्धांतों को सामने रखा गया था और अधिक न्यायपूर्ण, समावेशी तथा प्रतिनिधित्व वाली बहुपक्षीय व्यवस्था की दिशा में काम करते समय ‘बांडुंग स्पिरिट’ एक महत्वपूर्ण संदर्भ बनी हुई है।
जयराम रमेश ने नेहरू के नोट्स का किया जिक्र
जयराम रमेश ने अपने पोस्ट में 22 अप्रैल 1955 को बांडुंग सम्मेलन के दौरान जवाहरलाल नेहरू द्वारा लिखे गए कथित नोट्स का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हाल में बांडुंग में नेहरू द्वारा लिखे गए नोट्स, टिप्पणियों और डूडल्स को लेकर एक लेख सामने आया है।
कांग्रेस नेता का संदेश मूल रूप से यह बताने की कोशिश था कि आज के BRICS घोषणापत्र में जिस ‘बांडुंग स्पिरिट’ का उल्लेख किया गया है, उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में नेहरू की कूटनीतिक भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है।
इसी राजनीतिक तंज को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने मशहूर गीत की पंक्ति—‘तू जहां-जहां चलेगा, मेरा साया साथ होगा’—का इस्तेमाल किया।
कांग्रेस का निशाना क्या है?
कांग्रेस इस संदर्भ के जरिए यह संदेश देना चाहती है कि विदेश नीति और वैश्विक कूटनीति के जिन सिद्धांतों को आज BRICS जैसे मंच पर दोहराया जा रहा है, उनकी जड़ें भारत की पुरानी कूटनीतिक विरासत में भी मौजूद हैं।
हालांकि, घोषणापत्र में जवाहरलाल नेहरू का नाम सीधे तौर पर पैरा 16 में नहीं है। वहां 1955 के बांडुंग सम्मेलन और उसके सिद्धांतों का उल्लेख है। नेहरू के साथ इसका संबंध कांग्रेस नेता ने अपने राजनीतिक और ऐतिहासिक संदर्भ के रूप में सामने रखा है।
BRICS में भारत की कूटनीतिक भूमिका
2026 में भारत BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को 18वां शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष BRICS के 20 वर्ष पूरे होने के मौके पर भारत ने ग्लोबल साउथ, बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार और विकासशील देशों की अधिक भागीदारी को प्रमुख मुद्दों में रखा है।
ऐसे में नई दिल्ली घोषणापत्र में बांडुंग स्पिरिट का उल्लेख कांग्रेस को केंद्र सरकार पर निशाना साधने का एक और राजनीतिक मुद्दा दे गया है।
कांग्रेस का तंज साफ है—BRICS के नए घोषणापत्र में बांडुंग की पुरानी विरासत दिखाई दे रही है, तो पार्टी ने उसी बहाने नेहरू की कूटनीतिक विरासत याद दिलाते हुए मोदी सरकार पर कटाक्ष कर दिया।

