Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी से पहले बाजारों में भगवान गणेश की छोटी-बड़ी मूर्तियों की बिक्री शुरू हो गई है। मिट्टी, शाडू माटी और POP से बनी मूर्तियां अलग-अलग रूप में उपलब्ध हैं। ऐसे में केवल मूर्ति का रंग, चमक या वजन देखकर यह तय करना मुश्किल हो सकता है कि वह वास्तव में मिट्टी की है या Plaster of Paris (POP) की।
कई बार POP की मूर्ति को मिट्टी जैसा रूप देने के लिए उस पर विशेष पेंट किया जाता है। वहीं अच्छी तरह तैयार की गई मिट्टी की मूर्ति भी काफी चिकनी और आकर्षक दिखाई दे सकती है। इसलिए गणपति की प्रतिमा खरीदते समय केवल ‘इको-फ्रेंडली’ शब्द सुनकर फैसला करने के बजाय कुछ जरूरी सवाल जरूर पूछने चाहिए।
1. मूर्ति किस सामग्री से बनी है?
सबसे पहले दुकानदार से सीधे पूछें कि मूर्ति प्राकृतिक मिट्टी, शाडू माटी या किसी अन्य सामग्री से बनी है। अगर इसमें किसी तरह का मिश्रण इस्तेमाल हुआ है तो उसमें क्या-क्या शामिल है, इसकी जानकारी लें।
सिर्फ वजन के आधार पर मिट्टी और POP की पहचान करना भरोसेमंद तरीका नहीं है। मूर्ति का आकार, उसकी बनावट, खोखलापन और नमी उसके वजन को बदल सकते हैं।
संभव हो तो खरीदारी की रसीद पर मूर्ति की सामग्री लिखवाना भी बेहतर विकल्प है।
2. मूर्ति पर किस तरह का रंग लगाया गया है?
मूर्ति मिट्टी की होने के बावजूद उस पर इस्तेमाल किया गया पेंट पर्यावरण के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए विक्रेता से पूछें कि रंग वॉटर-बेस्ड, प्राकृतिक या पर्यावरण के अनुकूल है या नहीं।
इसके अलावा मूर्ति पर लगी प्लास्टिक की आंखें, ग्लिटर, थर्माकोल, प्लास्टिक के मोती और अन्य सजावटी सामग्री भी जांचें। ऐसी चीजें विसर्जन के बाद पानी में आसानी से नहीं घुलतीं।
3. विसर्जन के बाद मूर्ति कितनी आसानी से घुलेगी?
दुकानदार से यह भी पूछ सकते हैं कि मूर्ति का विसर्जन किस तरह करने की सलाह दी गई है और क्या इसे घर के बाल्टी, टब या कृत्रिम विसर्जन कुंड में विसर्जित किया जा सकता है।
हालांकि किसी मूर्ति के पानी में घुलने का समय केवल एक दावे से तय नहीं किया जा सकता। मूर्ति का आकार, मोटाई, निर्माण प्रक्रिया और पानी की मात्रा जैसे कई कारक इसमें प्रभाव डालते हैं।
अगर मूर्ति POP की है, तो उसे प्राकृतिक जलस्रोत में विसर्जित करने से पहले अपने स्थानीय नगर निकाय के नियम जरूर देख लें। अलग-अलग शहरों में विसर्जन को लेकर अलग व्यवस्था हो सकती है।
4. मूर्ति किसने बनाई और क्या रसीद मिलेगी?
मूर्ति खरीदते समय विक्रेता से उसके निर्माता या मूर्तिकार के बारे में जानकारी मांगना भी उपयोगी है। अगर दुकान पर मिट्टी और POP दोनों तरह की मूर्तियां हैं तो उन्हें अलग-अलग दिखाने के लिए कहें।
सिर्फ ‘इको-फ्रेंडली’ लिखा होना अपने आप में सामग्री की पूरी गारंटी नहीं माना जाना चाहिए। इसलिए सामग्री, रंग और रसीद के बारे में स्पष्ट जानकारी लेना बेहतर है।
क्या सिर्फ मिट्टी की मूर्ति ही जरूरी है?
मिट्टी से प्रतिमा बनाकर पूजा करने की परंपरा पुरानी है और प्राकृतिक मिट्टी की प्रतिमा विसर्जन के बाद प्रकृति में वापस मिलने के भाव से भी जुड़ी है। हालांकि मूर्ति की सामग्री के आधार पर किसी की श्रद्धा या पूजा को सही या गलत ठहराना उचित नहीं है।
गणपति की प्रतिमा खरीदते समय उसकी मजबूती, स्वरूप, आकार और विसर्जन की व्यवस्था भी ध्यान में रखें। टूटी या चटकी हुई मूर्ति लेने से बचें।
सबसे जरूरी बात
मिट्टी और POP की पहचान केवल वजन देखकर नहीं की जा सकती। मूर्ति खरीदते समय सामग्री, रंग, सजावटी सामान और विसर्जन की जानकारी जरूर लें। यदि संभव हो तो विक्रेता से रसीद पर सामग्री का उल्लेख भी करवाएं।
बप्पा को घर लाना सिर्फ एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी भी है। इसलिए ऐसी प्रतिमा चुनना बेहतर है जिसका विसर्जन स्थानीय नियमों और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए किया जा सके।

