Ganesh Chaturthi 2026: पिठोरी अमावस्या खत्म होने के बाद गणपति की मूर्ति खरीदने को लेकर कई लोगों के मन में सवाल हैं। जानिए मूर्ति कब खरीदें, घर लाने के बाद कहां रखें और विधिवत स्थापना कब करें।
Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी को लेकर घरों और बाजारों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। कई परिवार गणपति की प्रतिमा पहले ही खरीदकर घर लाते हैं, जबकि कुछ लोग शुभ तिथि का इंतजार करते हैं। पिठोरी अमावस्या के कारण जिन लोगों ने मूर्ति खरीदना टाल दिया था, उनके लिए अब यह सवाल अहम है कि गणपति की प्रतिमा कब घर लाई जा सकती है।
दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार 11 सितंबर 2026 को सुबह 8:56 बजे अमावस्या तिथि समाप्त हो गई, जिसके बाद भाद्रपद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा शुरू हो गई। ऐसे में अमावस्या के दौरान नई या मांगलिक वस्तु घर नहीं लाने की पारिवारिक परंपरा मानने वाले लोग इसके बाद गणपति की मूर्ति खरीदकर घर ला सकते हैं।
हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि अमावस्या पर गणपति की मूर्ति खरीदना सभी स्थानों और परिवारों में वर्जित हो, ऐसा कोई एक समान नियम नहीं है। अलग-अलग क्षेत्रों में परंपराएं अलग हो सकती हैं।
मूर्ति खरीदना और स्थापना अलग-अलग प्रक्रिया
गणेशोत्सव को लेकर अक्सर लोगों को इन तीन चीजों में भ्रम रहता है—
मूर्ति खरीदना: दुकान या मूर्तिकार से गणपति की प्रतिमा खरीदना।
मूर्ति घर लाना: खरीदी गई प्रतिमा को सम्मानपूर्वक अपने घर लेकर आना।
गणपति स्थापना: शुभ मुहूर्त में चौकी सजाकर प्रतिमा का विधिवत पूजन, संकल्प और आवाहन करना।
इसलिए गणेश चतुर्थी से पहले गणपति की प्रतिमा घर लाना और उसे सुरक्षित स्थान पर रखना अलग बात है। विधिवत स्थापना गणेश चतुर्थी के दिन की जाती है।
घर लाने के बाद गणपति की मूर्ति कहां रखें?
अगर गणपति की प्रतिमा पहले घर लाई जा रही है तो उसे सीधे फर्श पर रखने के बजाय किसी साफ पाटे, मेज या चौकी पर कपड़ा बिछाकर रखा जा सकता है।
खासकर मिट्टी की मूर्ति को नमी, पानी और तेज धूप से बचाना जरूरी है। ऐसी जगह प्रतिमा न रखें जहां बच्चों, पालतू जानवरों या घर के सामान से टकराकर मूर्ति टूटने का खतरा हो।
स्थापना से पहले सामान्य रूप से गणपति को प्रणाम किया जा सकता है, लेकिन विधिवत संकल्प, आवाहन, भोग और आरती स्थापना के समय से शुरू करने की बात कही गई है।
क्या गणपति का चेहरा ढककर लाना जरूरी है?
कई परिवारों में गणपति की प्रतिमा को घर लाते समय या स्थापना से पहले उनका चेहरा ढककर रखने की परंपरा है। इसे कुछ स्थानों पर स्थापना तक औपचारिक दर्शन से जुड़ी परंपरा माना जाता है।
लेकिन इसे हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य नियम नहीं माना जा सकता। जिस परिवार में यह परंपरा चली आ रही है, वहां उसका पालन किया जा सकता है।
14 सितंबर को होगी गणेश चतुर्थी
वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे शुरू होकर 15 सितंबर को सुबह 7:44 बजे तक रहेगी।
दिल्ली के लिए दिए गए विवरण में गणपति स्थापना और मध्याह्न पूजा का समय सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक बताया गया है। अलग-अलग शहरों में स्थानीय सूर्योदय और पंचांग गणना के कारण समय में अंतर हो सकता है।
गणपति की मूर्ति खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
मूर्ति खरीदते समय केवल सुंदरता और सजावट देखकर फैसला न करें। प्रतिमा को ध्यान से देखें कि कहीं वह टूटी या चटकी हुई तो नहीं है।
- हाथ और पैर सही स्थिति में हों।
- सूंड और मुकुट अच्छी तरह बने हों।
- मूषक की आकृति भी ठीक हो।
- प्रतिमा में कहीं दरार न हो।
- घर में उपलब्ध स्थान के अनुसार मूर्ति का आकार चुनें।
- विसर्जन की व्यवस्था पहले से तय कर लें।
- पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए प्राकृतिक मिट्टी की प्रतिमा को प्राथमिकता दी जा सकती है।
निष्कर्ष
पिठोरी अमावस्या समाप्त होने के बाद गणपति की मूर्ति खरीदने को लेकर जिन लोगों के मन में संशय था, वे अब अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार प्रतिमा खरीदकर घर ला सकते हैं। मूर्ति पहले घर लाना और गणपति की विधिवत स्थापना करना एक ही प्रक्रिया नहीं है। गणेश चतुर्थी के दिन स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त में स्थापना कर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना शुरू की जा सकती है।

