Ganesh Chaturthi 2026: गणपति स्थापना में क्यों रखते हैं 2 सुपारी? जानिए रिद्धि-सिद्धि से जुड़ा धार्मिक महत्व

Ganesh Chaturthi 2026: गणपति स्थापना में क्यों रखते हैं 2 सुपारी? जानिए रिद्धि-सिद्धि से जुड़ा धार्मिक महत्व

14 सितंबर को होगी गणेश स्थापना, पूजा में दो सुपारी रखने की है खास परंपरा; जानिए सुपारी का महत्व और पूजन की सही विधि

धर्म डेस्क। गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश की आराधना और स्थापना के लिए विशेष माना जाता है। इस बार 14 सितंबर 2026 को गणेश स्थापना की जाएगी। गणपति स्थापना के दौरान पूजा सामग्री में सुपारी का भी विशेष महत्व बताया गया है।

हिंदू पूजा पद्धति में कई अवसरों पर सुपारी को देवता के प्रतीकात्मक स्वरूप के रूप में स्थापित कर उसका पूजन किया जाता है। गणेश स्थापना के समय भी दो साबुत सुपारी रखने की परंपरा कई पूजा विधानों में बताई गई है। इन्हें भगवान गणेश की दो शक्तियों रिद्धि और सिद्धि का प्रतीक माना जाता है।.

Lord Ganesha in Orange Traditional Attire - GodsPhoto

गणेश जी के साथ दो सुपारी क्यों रखते हैं?

मान्यता के अनुसार यदि रिद्धि-सिद्धि की अलग प्रतिमा उपलब्ध नहीं हो तो दो साबुत सुपारी को उनके प्रतीक के रूप में रखा जा सकता है।

एक सुपारी को रिद्धि और दूसरी को सिद्धि का प्रतीक मानकर भगवान गणेश के साथ पूजा की जाती है। इसके पीछे भाव यह है कि गणपति के साथ घर में बुद्धि, समृद्धि, सफलता और कार्यसिद्धि का संकल्प लिया जाए।

पूजा में सुपारी का क्या महत्व है?

पूजा में सुपारी को पूर्णता और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। सुपारी कठोर और अखंड होती है, इसलिए इसे संकल्प की दृढ़ता से भी जोड़ा जाता है।

कलश स्थापना के दौरान भी सुपारी का प्रयोग किया जाता है। इसमें सुपारी को कलश में स्थापित देवशक्ति के प्रतीकात्मक पूजन का हिस्सा माना जाता है।

Ganesh temple in Maharashtra | Ganesh Chaturthi in Maharashtra - Club Mahindra

गणेश स्थापना में दो सुपारी ऐसे रखें

  • पूजा के लिए साफ और साबुत दो सुपारी लें।
  • दोनों सुपारी को स्वच्छ जल से धोकर शुद्ध करें। चाहें तो गंगाजल से भी शुद्ध कर सकते हैं।
  • पूजा की चौकी पर पान का पत्ता या अक्षत रखकर उसके ऊपर सुपारी स्थापित करें।
  • रिद्धि-सिद्धि के प्रतीक के रूप में रखने पर दोनों सुपारी को अलग-अलग रखें।
  • दोनों सुपारी पर लाल मौली बांधें।
  • रोली या कुमकुम और अक्षत लगाएं।
  • पुष्प अर्पित कर धूप-दीप दिखाएं।
  • भगवान गणेश का ध्यान करते हुए रिद्धि-सिद्धि का भी स्मरण करें।
  • इसके बाद गणेश जी की विधिवत पूजा और मंत्र जाप करें।

Decorated and garlanded idol of Hindu God Ganesha in Pune ,Maharashtra, India.

रिद्धि-सिद्धि की मूर्ति नहीं है तो सुपारी से कर सकते हैं पूजा

यदि गणेश स्थापना के समय रिद्धि-सिद्धि की अलग प्रतिमा उपलब्ध नहीं है, तो परंपरा के अनुसार दो सुपारी रखकर उनका प्रतीकात्मक पूजन किया जा सकता है।

इसमें मुख्य भाव भगवान गणेश के साथ रिद्धि-सिद्धि का ध्यान करते हुए घर में सुख, समृद्धि, बुद्धि और सफलता की कामना करना है।

Lord ganesha statue seated on ornate throne photo – Free Ganesh Image on Unsplash

ध्यान रखें

पूजा-पद्धतियां क्षेत्र, परिवार और परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए अपने परिवार की परंपरा या स्थानीय पुरोहित द्वारा बताई गई विधि को प्राथमिकता देना उचित रहेगा।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। इसे किसी वैज्ञानिक या चिकित्सकीय तथ्य के रूप में न लें। पूजा की विधि के लिए अपने परिवार की परंपरा या संबंधित विद्वान/पुरोहित की सलाह लें।

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