सेंधमारी और दल-बदल की आशंका के बीच भाजपा प्रत्याशी जोधपुर के रिसॉर्ट में, कांग्रेस ने पाली से प्रत्याशियों को जयपुर के फार्म हाउस भेजा; 14 सितंबर को मतगणना के दिन लौटेंगे
पाली। निकाय चुनाव की मतगणना से पहले महापौर और उप महापौर की कुर्सी को लेकर कांग्रेस और भाजपा ने अपने-अपने पार्षद प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी शुरू कर दी है। मतदान खत्म होने के बाद दोनों ही दल अपने संभावित विजयी प्रत्याशियों को एकजुट रखने में जुट गए हैं। सेंधमारी और दल-बदल की आशंका के बीच प्रत्याशियों को बाहरी संपर्क से दूर रखने की रणनीति अपनाई जा रही है।
भाजपा ने अपने पार्षद प्रत्याशियों को जोधपुर के एक रिसॉर्ट में ठहराया है, जबकि कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों को जयपुर की ओर एक फार्म हाउस में भेजा है। माना जा रहा है कि अब प्रत्याशी मतगणना के दिन 14 सितंबर को ही वापस नजर आएंगे।
कांग्रेस ने सुबह से शुरू की बाड़ेबंदी
कांग्रेस की ओर से शनिवार सुबह पाली स्थित कांग्रेस भवन से मिनी बस के जरिए कई पार्षद प्रत्याशियों को जयपुर की ओर रवाना किया गया। इसके कुछ देर बाद कुछ अन्य प्रत्याशियों को दूसरी बस से भेजा गया।
इस दौरान कांग्रेस के नेता और पदाधिकारी भी मौजूद रहे। प्रत्याशियों को आवश्यक सामान साथ लेकर चलने के निर्देश दिए गए। कुछ प्रत्याशियों ने नाम नहीं बताने की शर्त पर बताया कि वे दो-तीन दिन के कपड़े लेकर जा रहे हैं और अब मतगणना के दिन ही वापस लौटेंगे।
कांग्रेस की इस कवायद को चुनाव परिणाम से पहले अपने प्रत्याशियों को एकजुट रखने और संभावित राजनीतिक सेंधमारी से बचाने की रणनीति माना जा रहा है।
बेटी को साथ लेकर पहुंचीं वार्ड 54 की प्रत्याशी
बाड़ेबंदी के लिए पहुंचीं वार्ड संख्या 54 की कांग्रेस प्रत्याशी गुड्डी अपनी बेटी को भी साथ लेकर आईं। उन्होंने बताया कि बेटी अभी छोटी है और उसे अकेला नहीं छोड़ा जा सकता, इसलिए वह उसे अपने साथ लेकर जा रही हैं।
वहीं वार्ड 16 की प्रत्याशी पूरण कंवर पत्नी योगेश कुमार भी अपने दो साल के बेटे वेदांत को साथ लेकर पहुंचीं। उन्हें भी कांग्रेस नेताओं की ओर से फोन कर बुलाया गया था।
कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता रहे मौजूद
पाली कांग्रेस भवन से प्रत्याशियों की रवानगी के दौरान जिला अध्यक्ष शिशुपाल सिंह निंबाड़ा, पाली विधायक भीमराज भाटी, कांग्रेस चुनाव प्रभारी हेमसिंह शेखावत, कांग्रेस नेता महावीर सिंह राजपुरोहित और पूर्व सभापति प्रदीप हिंगड़ सहित कई नेता मौजूद रहे।
नेताओं की मौजूदगी में प्रत्याशियों को बसों के जरिए जयपुर की ओर रवाना किया गया।
शुक्रवार देर रात भाजपा ने भी की बाड़ेबंदी
कांग्रेस से पहले भाजपा ने भी शुक्रवार देर रात अपने प्रत्याशियों को बाड़ेबंदी में भेज दिया था। पाली से भाजपा के पार्षद प्रत्याशियों को दो बसों के जरिए जोधपुर के एक रिसॉर्ट ले जाया गया। कुछ प्रत्याशी अपनी कारों से भी रवाना हुए।
इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष सुनील भंडारी और पूर्व विधायक ज्ञानचंद पारख पूरी व्यवस्था पर नजर रखते दिखाई दिए।
शनिवार को भाजपा के ज्यादातर प्रत्याशी रिसॉर्ट में ही रहे। कई प्रत्याशियों ने चुनावी भागदौड़ के बाद आराम करने की बात कही, जबकि कुछ प्रत्याशी चाय-कॉफी के साथ बैठकर चुनावी चर्चा और जीत के संभावित समीकरणों पर मंथन करते नजर आए।
महापौर की कुर्सी के लिए जोड़-तोड़ का गणित
निकाय चुनाव के नतीजों से पहले दोनों प्रमुख दलों की बाड़ेबंदी को महापौर और उप महापौर के चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। यदि किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीय या अन्य पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
ऐसी स्थिति में चुनाव परिणाम आने के बाद पार्षदों के पाला बदलने या दूसरे दलों के संपर्क में जाने की आशंका रहती है। यही कारण है कि दोनों दल अपने संभावित विजयी प्रत्याशियों को पहले से ही एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं।
अब 14 सितंबर को खुलेगा चुनावी पिटारा
मतदान के बाद प्रत्याशियों की किस्मत EVM में बंद है, लेकिन महापौर और उप महापौर की कुर्सी को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने गणित को मजबूत करने में जुटे हैं।
अब 14 सितंबर को मतगणना के बाद ही साफ होगा कि किस दल को बहुमत मिलता है और किसे बोर्ड बनाने के लिए दूसरे पार्षदों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी। फिलहाल दोनों दलों की बाड़ेबंदी ने निकाय चुनाव के बाद होने वाली सियासी जोड़-तोड़ की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं।


