100 वार्डों के नतीजों से पहले क्रॉस वोटिंग और पाला बदलने की आशंका, दोनों दलों में हलचल; पहले बोर्ड पर गहलोत-शेखावत की साख भी दांव पर
जोधपुर। नगर निगम के 100 वार्डों में शुक्रवार को मतदान खत्म होते ही सियासी हलचल तेज हो गई है। मतदान थमने के साथ ही प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों ने अपना-अपना महापौर बनाने का दावा किया है। अब चुनाव परिणाम से पहले राजनीतिक गलियारों से लेकर सट्टा बाजार तक सबसे बड़ा सवाल यही है कि जोधपुर नगर निगम का बोर्ड आखिर किसके कब्जे में जाएगा?
नतीजों से पहले क्रॉस वोटिंग और पार्षदों के पाला बदलने की आशंका ने दोनों प्रमुख दलों की चिंता बढ़ा दी है। बहुमत का आंकड़ा हासिल करने के लिए एक-एक पार्षद महत्वपूर्ण हो सकता है। यही वजह है कि भाजपा ने मतदान खत्म होते ही अपने प्रत्याशियों को एकजुट रखने की कवायद शुरू कर दी है।
भाजपा ने शुक्रवार रात से ही शुरू की बाड़ेबंदी
राजनीतिक सेंधमारी से अपने संभावित विजयी प्रत्याशियों को बचाने के लिए भाजपा ने शुक्रवार रात से ही बाड़ेबंदी शुरू कर दी। पार्टी की ओर से प्रत्याशियों को फोन कर अतिरिक्त कपड़े साथ लाने और भाजपा कार्यालय पहुंचने के निर्देश दिए गए।
रात में पार्टी कार्यालय में सभी प्रत्याशियों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। भोजन के बाद प्रत्याशियों को अलग-अलग समूहों में लग्जरी बसों के जरिए अज्ञात स्थान के लिए रवाना किया गया।
हालांकि आधिकारिक तौर पर इस पूरी कवायद को धार्मिक यात्रा बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे चुनाव परिणाम और बोर्ड गठन से पहले प्रत्याशियों को एकजुट रखने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
कांग्रेस फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ मोड में
भाजपा के मुकाबले कांग्रेस ने अभी तक अपने प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की है। कांग्रेस की ओर से शनिवार को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में चुनाव परिणाम और बोर्ड गठन को लेकर रणनीति पर चर्चा होने के बाद प्रत्याशियों को शिफ्ट करने को लेकर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
चुनाव लड़ चुके कुछ उम्मीदवारों का कहना है कि उन्हें अभी तक पार्टी आलाकमान या वरिष्ठ नेताओं की ओर से बाड़ेबंदी को लेकर कोई फोन नहीं आया है। ऐसे में फिलहाल कांग्रेस की रणनीति ‘वेट एंड वॉच’ की दिखाई दे रही है।

पहली बार 100 वार्डों का एकीकृत निगम
परिसीमन के बाद इस बार जोधपुर में 100 वार्डों का एकीकृत नगर निगम बना है। इससे पहले जोधपुर उत्तर और जोधपुर दक्षिण के रूप में दो अलग-अलग नगर निगम थे।
पिछले राजनीतिक समीकरणों में जोधपुर उत्तर पर कांग्रेस और जोधपुर दक्षिण पर भाजपा का बोर्ड था। अब दोनों निगमों के एकीकरण के बाद पहली बार पूरे जोधपुर के लिए एक ही बोर्ड चुना जा रहा है।
इसी वजह से इस चुनाव का महत्व पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा बढ़ गया है।
गहलोत और शेखावत की साख भी दांव पर
जोधपुर नगर निगम का यह चुनाव सिर्फ पार्षद और महापौर की कुर्सी तक सीमित नहीं माना जा रहा। इसे प्रदेश की राजनीति के दो बड़े चेहरों की प्रतिष्ठा से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, दोनों का जोधपुर से गहरा राजनीतिक जुड़ाव है। ऐसे में एकीकृत नगर निगम के पहले बोर्ड पर किसका कब्जा होता है, इसे दोनों नेताओं के राजनीतिक प्रभाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
भाजपा जहां अपना बोर्ड बनाने का दावा कर रही है, वहीं कांग्रेस भी बहुमत हासिल कर महापौर की कुर्सी पर कब्जा जमाने की उम्मीद लगाए हुए है।
निर्दलीय पार्षद बन सकते हैं निर्णायक
अगर 100 वार्डों के परिणाम में भाजपा या कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।
ऐसी स्थिति में जिस पार्टी के पास बहुमत से कुछ सीटें कम होंगी, उसके लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन बोर्ड गठन की चाबी बन सकता है। यही वजह है कि नतीजों से पहले ही संभावित विजयी निर्दलीय प्रत्याशियों को लेकर भी राजनीतिक दलों की नजरें बनी हुई हैं।
अब EVM खुलने का इंतजार
मतदान खत्म हो चुका है और प्रत्याशियों की किस्मत EVM में बंद है। लेकिन परिणाम आने से पहले ही बाड़ेबंदी, संभावित क्रॉस वोटिंग और बोर्ड गठन के गणित ने जोधपुर की राजनीति को गरमा दिया है।
भाजपा ने जहां अपने प्रत्याशियों को एकजुट रखने की रणनीति पर तेजी से काम शुरू कर दिया है, वहीं कांग्रेस शनिवार की बैठक के बाद अपनी अगली चाल तय कर सकती है।
अब असली तस्वीर मतगणना के बाद ही साफ होगी कि 100 वार्डों वाले नए एकीकृत जोधपुर नगर निगम का पहला बोर्ड भाजपा बनाएगी, कांग्रेस या फिर निर्दलीय पार्षद सत्ता की चाबी अपने हाथ में रखेंगे।

