नीट-यूजी 2026 परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द होने और मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने पर राजस्थान के कई वरिष्ठ नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। नेताओं ने इस मुद्दे को युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए सरकार, एनटीए और जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले में कहा कि 3 मई को परीक्षा होने के तुरंत बाद छात्रों ने पेपर लीक की शिकायत की थी लेकिन इसके बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं होना समझ से परे है। उन्होंने कहा कि लगातार तीन वर्षों से पेपर लीक की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे युवा पीढ़ी निराश और परेशान है। गहलोत ने इसे बड़ी चुनौती बताते हुए स्थायी समाधान की जरूरत बताई।
प्रदेश के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि जांच एजेंसियों को गड़बड़ी मिली होगी, तभी परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया। उन्होंने कहा कि जहां भी अनियमितता मिलेगी, सरकार उसे सुधारने के लिए काम करेगी।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि एनटीए ने तुरंत कार्रवाई करते हुए परीक्षा रद्द की है। उन्होंने बताया कि दोबारा परीक्षा देने वाले छात्रों को फिर से फीस जमा नहीं करनी होगी और वही परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कर दोषियों को सजा दी जाएगी।
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने आरोप लगाया कि पेपर लीक के पीछे बड़ा माफिया सक्रिय है और सरकार को बार-बार हो रही ऐसी घटनाओं पर गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए।
वहीं नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि परीक्षा रद्द होना संगठित स्तर पर हुई गंभीर धांधली का प्रमाण है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 10 वर्षों में पेपर लीक के दर्जनों मामले सामने आए हैं और सरकार युवाओं के भविष्य की रक्षा करने में विफल रही है। जूली ने राज्य सरकार पर सच्चाई दबाने और छात्रों को अनिश्चितता में रखने का भी आरोप लगाया।








