अब जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र के महाप्रबंधक ही दे सकेंगे स्वीकृति, तकनीकी अपग्रेडेशन पर 50 लाख रुपये तक की सहायता

अब जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र के महाप्रबंधक ही दे सकेंगे स्वीकृति, तकनीकी अपग्रेडेशन पर 50 लाख रुपये तक की सहायता
जयपुर, 01 मार्च।  उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के योजनाओं और नीतियों की आवेदन और स्वीकृति प्रक्रिया में आवश्यक सुधार किए जा रहे हैं, ताकि इनका लाभ अधिक से अधिक लोगों को मिल सके। इसी क्रम में दो नीतियों की स्वीकृति प्रक्रिया का सरलीकरण और तीन नीतियों की आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन की गई है।
उद्योग एवं वाणिज्य आयुक्त सुरेश ओला ने बताया कि एक जिला एक उत्पाद नीति-2024 और राजस्थान एमएसएमई नीति -2024 के तहत स्वीकृति प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। अब इन दोनों योजनाओं के तहत आने वाले आवेदनों की जांच और स्वीकृति की कार्यवाही जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्रों के महाप्रबंधकों द्वारा ही की जा सकेगी। इस बदलाव से आवेदन के निस्तारण में तेजी आएगी, जिससे ज्यादा लोगों को लाभ मिल सकेगा।
ओला ने बताया कि पूर्व में इन योजनाओं के तहत आने वाले आवेदनों की जांच और स्वीकृति के लिए जिला स्तरीय टास्क फोर्स समिति कार्य करती थी, लेकिन अब इसको विलोपित कर दिया गया है और उससे जुड़े सभी अधिकार महाप्रबंधकों को दे दिए गए हैं। इसलिए अब एक निश्चित समयांतराल पर होने वाली बैठक का इंतजार किए बिना ही सामान्य प्रक्रिया के तहत आवेदनों पर कार्यवाही की जा सकेगी।

आवेदन ऑनलाइन होने से हर दिन आ रहे 9 आवेदन

ओला ने बताया कि विभाग की तीन नीतियों के आवेदन ऑनलाइन करने से इनकी संख्या काफी बढ़ रही है। एक फरवरी से अब तक एक जिला एक उत्पाद नीति के लिए 72, एमएसएमई नीति के लिए 77 और निर्यात प्रोत्साहन नीति के लिेए 96 सहित कुल 245 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इन तीनों योजनाओं के लिए हर दिन औसतन 9 आवेदन आ रहे हैं। ऑफलाइन प्रक्रिया के दौरान इनकी संख्या 2 आवेदन प्रतिदिन से भी कम थी।

ओडीओपी: 20 लाख रुपये तक मार्जिन मनी अनुदान

राज्य के विशिष्ट उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए लागू की गई एक जिला एक उत्पाद नीति-2024 के तहत सभी 41 जिलों में एक-एक उत्पाद की पहचान की गई है। इसके तहत सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को 20 लाख रुपये तक की मार्जिन मनी अनुदान दिया जाता है। साथ ही, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर पर 5 लाख रुपये तक अनुदान, क्वालिटी सर्टिफिकेशन और आईपीआर पर 3 लाख रुपये तक पुनर्भरण राज्य सरकार द्वारा देय है। विपणन आयोजनों में भाग लेने के लिए 2 लाख रुपये तक सहायता, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म फीस पर 1 लाख रुपये प्रतिवर्ष का 2 साल तक पुनर्भरण और कैटलॉगिंग और ई-कॉमर्स वेबसाइट विकास के लिए 75 हजार रुपये तक एकमुश्त सहायता का प्रावधान है।

एमएसएमई: एसएमई एक्सचेंज से धन जुटाने पर 15 लाख रुपये तक की सहायता

राज्य के छोटे उद्यमियों के वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने के उद्देश्य से लागू की राजस्थान एमएसएमई नीति-2024 के तहत ऋण पर अतिरिक्त 2 फीसदी ब्याज अनुदान दिया जाता है। साथ ही, एसएमई एक्सचेंज से धन जुटाने पर 15 लाख रुपये तक की सहायता, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी तथा सॉफ्टवेयर पर 5 लाख रुपये तक का अनुदान, क्वालिटी सर्टिफिकेशन और आईपीआर पर 3 लाख रुपये तक का पुनर्भरण का प्रावधान है। विपणन के लिए आयोजनों में भाग लेने पर 1.5 लाख रुपये तक का अनुदान, डिजिजल उपकरणों पर 50 हजार रुपये तक पुनर्भरण, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म फीस पर 50 हजार रुपये तक का पुनर्भरण किया जाता है।

निर्यात: तकनीकी अपग्रेडेशन पर 50 लाख रुपये तक की सहायता

राज्य के उद्यमियों को निर्यातक बनाने के उद्देश्य से लागू की राजस्थान निर्यात प्रोत्साहन नीति- 2024 के तहत निर्यातकों के दस्तावेजीकरण पर 5 लाख रुपये और तकनीकी अपग्रेडेशन पर 50 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भागीदारी पर 3 लाख रुपये तक का अनुदान और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म फीस पर 2 लाख रुपये तक का पुनर्भरण किया जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *