जयपुर स्थापना दिवस पर गुलाबी नगरी के पर्यटन स्थलों पर उल्लास और उत्सव की रौनक देखने को मिली। जंतर-मंतर, हवामहल, आमेर महल, अल्बर्ट हॉल सहित सभी प्रमुख स्मारकों पर सुबह से ही पर्यटकों की आवाजाही बढ़ गई। पारंपरिक परिधान, लोकधुनों और राजस्थानी आतिथ्य के बीच सैलानियों का स्वागत विशेष तौर पर किया गया।
राजधानी जयपुर आज 298 साल की हो गई. लगभग तीन शताब्दी पहले, 18 नवंबर, 1727 को, राज्य के इस गुलाबी शहर का निर्माण आमेर के महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने करवाया था. शहर का स्वरूप उनकी दूरदर्शी सोच की झलक है, जिसकी झलक आज हर प्राचीर, ऐतिहासिक इमारतों, शाही किलों और बाजारों में देखी जा सकती है.यह शहर भारतीय वास्तुकला के सिद्धांतों पर आधारित है. इसी वजह से इसे दुनिया का पहला सुनियोजित शहर माना जाता है. शहर का ग्रिड पैटर्न, चौड़ी सड़कें और 9 वर्गाकार ब्लॉक इसे अनोखा बनाते हैं
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जयपुर स्थापना दिवस पर गुलाबी नगरी….
हवामहल के प्रवेश द्वार पर खूबसूरत रंगाली (रंगोली) सजाई गई, जिसने यहां आने वाले देशी–विदेशी पर्यटकों का मन मोह लिया। आयोजन स्थल पर जयपुर के इतिहास, स्थापना की पृष्ठभूमि और हवामहल सहित अन्य स्मारकों की वास्तुकला से जुड़ी रोचक जानकारी भी पर्यटकों को दी गई। लगातार फोटो सेशन, गाइडेड टूर और पारंपरिक संगीत की गूंज से पूरा परिसर दिनभर जीवंत बना रहा
आमेर महल में पारंपरिक स्वागत, शहनाई वादन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पर्यटकों का मनोरंजन किया। वहीं अल्बर्ट हॉल संग्रहालय में इतिहास और कला-समृद्ध प्रदर्शनियों को देखने के लिए दर्शकों की भीड़ जुटी रही। फोटोग्राफी, वीडियो शूट्स और स्टोरी-कंटेंट बनाने वाले युवाओं ने इन स्मारकों को सोशल मीडिया पर ट्रेंडिंग बना दिया।
राजस्थान सरकार जयपुर के परकोटा क्षेत्र को और अधिक आकर्षक और संरक्षित बनाने की दिशा में बड़े कदम उठा रही है। इसके लिए लगभग ₹100 करोड़ की राशि खर्च की जाएगी। इस योजना के तहत परकोटा की दीवारों और दरवाजों का संरक्षण, विरासत बाजारों का पुनर्विकास, पर्यटन सुविधाओं का विस्तार, रात्रिकालीन पर्यटन को बढ़ावा जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
शहर की नींव
जयपुर की स्थापना साल 1727 में आमेर के राजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने की थी. कहा जाता है कि उस वक़्त आमेर की राजधानी जल संकट और कम जगह की वजह से फैलाई नहीं जा सकती थी. इसी को ध्यान में रखते हुए सवाई जय सिंह ने एक आधुनिक शहर की नींव रखी
गुलाबी नगरी की पहचान
सन् 1876 में, प्रिंस ऑफ वेल्स (बाद में किंग एडवर्ड VII) के स्वागत के लिए महाराजा सवाई राम सिंह द्वितीय ने पूरे शहर को उनकी मेहमानवाजी के लिए गेरुआ ( जिसे टेराकोटा पिंक कहते है.) रंग से रंगवा दिया था, जिसके बाद से यह ‘गुलाबी नगरी’ (Pink City) कहलाया. इसे पहले इसका रंग सफेद हुआ करता था
29 ऐतिहासिक दरवाजे
जयपुर शहर का निर्माण करते उसकी सुरक्षा के लिए काफी सजगता दिखाई गई थी. शहर को बनाते वक्त इसमें कुल 29 ऐतिहासिक दरवाजे बनाए गए हैं, जिनमें से 13 दरवाजे सिटी पैलेस में और 16 दरवाजे परकोटे में बनाए गए थे. जिसे शहर की पुरानी चारदीवारी (Walled City) की सुरक्षा मजबूत किया जा सके. जो आज भी झलकती है. अधिकारिक तौर पर, इस चारदीवारी में 7 मुख्य पोल या प्रवेश द्वार हैं (जैसे अजमेरी गेट, सांगानेरी गेट, चांद पोल, सूरज पोल, न्यू गेट, दिल्ली गेट,और विद्याधर नगर द्वार है. इन्हें हर दिशा में बनाया गया है. ).1727 में जयपुर की नींव का मुहूर्त गंगापोल गेट पर लगाया गया था. न्यू गेट सबसे बाद में बनाया गया











