बिहार विधानसभा चुनाव में राज्य की जनता ने एनडीए प्रचंड बहुमत दिया है. राज्य की 243 सीटों में से एनडीए को 200 से ज्यादा सीटें मिली है इस चुनाव में राज्य की इंडिया महागठबंधन ने अपने इतिहास के सबसे खराब प्रदर्शन को दोहराया है

बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 61 सीट पर चुनाव लड़ा और केवल छह सीट ही जीत सकी. राज्य कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम कुटुम्बा सीट से हार गए. कांग्रेस के जो छह उम्मीदवार जीते उनमें सुरेंद्र प्रसाद (वाल्मीकि नगर), अभिषेक रंजन (चनपटिया), मनोज विश्वास (फॉर्ब्सगंज), अबिदुर रहमान (अररिया), मोहम्मद कमरूल होदा (किशनगंज) और मनोहर प्रसाद सिंह (मनिहारी) शामिल हैं. राहुल गांधी के वोट चोरी का मुद्दा बिहार की जनता के आगे फीका पड़ गया.
हालांकि राजनीति गलियारों में ये भी चर्चा थी की सीट बंटवारे से राहुल गांधी खुश नहीं थे. यही कारण है कि महागठबंधन की ओर से सीएम फेस के ऐलान के लिए राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत को कांग्रेस ने पटना भेजा था. 2020 में कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन केवल 19 सीटें जीत पाई थी, जिससे महागठंधन की सरकार बनाने की उम्मीदों को तगड़ा झटका लगा था. राहुल गांधी की मतदाता अधिकार यात्रा, वोट चोरी के आरोपों और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ अभियान के बावजूद पार्टी को मतदाताओं से जुड़ने में संघर्ष करना पड़ा
तेजस्वी यादव और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी)
महागठबंधन ने काफी राजनीतिक उठापटक के बाद तेजस्वी यादव का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए नामित किया था, लेकिन वे नीतीश कुमार के खिलाफ किसी भी सत्ता विरोधी लहर को वोटों में तब्दील करने में असमर्थ रहे. हालांकि, उन्होंने राघोपुर में अपना गढ़ जीत लिया. 2010 में 22 सीटों के बाद यह आरजेडी के चुनावी इतिहास में दूसरा सबसे खराब प्रदर्शन है. इस बार आरजेडी को सिर्फ 25 सीटें मिली. 2020 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई थी. तब ये लगने लगा था कि लालू यादव के बाद तेजस्वी ने बहुत ही मजबूती से आरजेडी को संभाला है
सीमांचल क्षेत्र में एक प्रमुख चुनौती के रूप में पेश किए गए मुकेश सहनी महागठबंधन को उपमुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया. इसके बावजूद अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सके. उनकी विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के मुखिया मुकेश सहनी खुद को सन ऑफ मल्लाह बताते हैं, लेकिन वे अति पिछड़ी जाति बहुत सीटों पर वोट पाने में नाकाम रहे. उनका निषाद वोट बैंक भी कल्याणकारी योजनाओं के कारण एनडीए की ओर चला गया
बंगाल और तमिलनाडु सहित कई महत्वपूर्ण चुनावों से पहले इंडिया गठबंधन को एक बड़ा झटका लगा है. सीटों के बंटवारे पर मतभेद और अस्पष्ट नेतृत्व ने पार्टी के कमजोर प्रदर्शन का कारण बना. बीजेपी ने 89 सीटों पर, जेडीयू 89, एलजेपी (आर) 19, हम 5, आरएलएम सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि विपक्ष को केवल 35 सीटें मिली है. वाम दल अपने पहले प्रभाव को बरकरार रखने में असफल रहे











