चत्रभुज शर्मा, विनोद पारख, भावना, गणपत सिंह, वीणा देवड़ा, नटवर रामीणा और रमेश रखेशा के नामों की चर्चा; अध्यक्ष पद ‘जनरल ओपन’ होने से बढ़ी दावेदारों की रेस
सुमेरपुर। नगर पालिका चुनाव 2026 के नतीजों ने सुमेरपुर की राजनीति की तस्वीर साफ कर दी है। 35 वार्डों वाली सुमेरपुर नगर पालिका में भाजपा ने 19 सीटों पर जीत दर्ज कर बहुमत हासिल कर लिया है, जबकि कांग्रेस को 9 और निर्दलीयों को 7 सीटें मिली हैं। बहुमत के लिए 18 पार्षदों की जरूरत थी और भाजपा ने यह आंकड़ा एक सीट ज्यादा हासिल किया है। ऐसे में सुमेरपुर में भाजपा का बोर्ड बनना लगभग तय माना जा रहा है।
लेकिन चुनाव परिणाम के साथ ही अब सुमेरपुर की राजनीति में अगला और सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—
“नगर पालिका का चेयरमैन आखिर कौन बनेगा?”
यही सवाल अब शहर की राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गया है।
अध्यक्ष पद जनरल ओपन, इसलिए दावेदारों का दायरा बड़ा
सुमेरपुर नगर पालिका के इस चुनाव में अध्यक्ष पद जनरल ओपन है। स्थानीय चुनावी इतिहास पर प्रकाशित रिपोर्ट भी इसे स्पष्ट करती है और बताती है कि इस बार किसी भी वर्ग का योग्य निर्वाचित पार्षद अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल हो सकता है।
इसका सीधा मतलब है कि “General” का अर्थ केवल किसी एक सामान्य जाति से नहीं है। अध्यक्ष पद किसी विशेष जाति या वर्ग के लिए आरक्षित नहीं होने के कारण भाजपा के 19 निर्वाचित पार्षदों में से पात्र पार्षद के नाम पर पार्टी विचार कर सकती है।
यही वजह है कि अब सुमेरपुर में संभावित चेयरमैन को लेकर कई नाम चर्चा में हैं।
चर्चा में कौन-कौन से नाम?
स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में भाजपा के निर्वाचित पार्षदों में से कई नाम सामने आ रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
चत्रभुज शर्मा
वार्ड 23 से भाजपा के विजेता चत्रभुज शर्मा का नाम संभावित दावेदारों में चर्चा में है। पार्टी संगठन में उनकी स्वीकार्यता और स्थानीय राजनीतिक समीकरण उनके पक्ष में जा सकते हैं।
विनोद पारख
वार्ड 11 से भाजपा के विजेता विनोद पारख भी चेयरमैन पद की चर्चा में हैं। सामान्य/अनारक्षित अध्यक्ष पद होने के कारण उनके नाम पर भी राजनीतिक रूप से विचार संभव है।
भावना
वार्ड 18 से भाजपा की विजेता भावना का नाम भी चर्चा में है। अध्यक्ष पद सामान्य होने के कारण महिला पार्षद भी इस दौड़ में पूरी तरह शामिल हो सकती हैं।
गणपत सिंह
वार्ड 7 से भाजपा के विजेता गणपत सिंह भी संभावित नामों में हैं। चुनाव से पहले जिन वार्डों को कांटे की टक्कर वाला माना गया था, उनमें वार्ड 7 भी शामिल था और यहां भाजपा ने जीत दर्ज की।
वीणा देवड़ा
वार्ड 26 से भाजपा की विजेता वीणा देवड़ा का नाम भी अब राजनीतिक चर्चाओं में जोड़ा जा रहा है। सामान्य ओपन अध्यक्ष पद होने के कारण उनके नाम को भी केवल सामाजिक वर्ग के आधार पर बाहर नहीं किया जा सकता।
नटवर रामीणा
वार्ड 25 से भाजपा के विजेता नटवर रामीणा भी संभावित दावेदारों की चर्चा में हैं। बहुमत के बाद भाजपा के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपने पार्षदों में से अध्यक्ष पद के लिए सहमति बनाने की होगी।
रमेश रखेशा
वार्ड 8 से भाजपा के विजेता रमेश रखेशा का नाम भी सुमेरपुर की राजनीतिक चर्चाओं में सामने आ रहा है। वार्ड 8 में इस चुनाव में 81 प्रतिशत से ज्यादा मतदान भी दर्ज हुआ था, जो सुमेरपुर के सबसे अधिक मतदान वाले वार्डों में रहा।
लेकिन क्या इनमें से कोई चेयरमैन बनना तय है?
नहीं।
यही बात खबर में सबसे महत्वपूर्ण है।
अभी इन नामों को “संभावित दावेदार” या “चर्चा में नाम” कहना ही सही होगा। इनमें से किसी एक को अभी से चेयरमैन घोषित करना जल्दबाजी होगी।
भाजपा के पास 19 पार्षदों का बहुमत है, लेकिन अध्यक्ष पद के लिए पार्टी के भीतर किस नाम पर सहमति बनती है, यही आने वाले दिनों में सबसे बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम होगा।
सुमेरपुर में अध्यक्ष पद का चुनाव 21 सितंबर को प्रस्तावित होने की जानकारी स्थानीय रिपोर्ट में दी गई है।
19 का आंकड़ा भाजपा के लिए ताकत, लेकिन चेयरमैन का चुनाव अलग कहानी
भाजपा के पास 19 पार्षद हैं।
कांग्रेस के पास 9।
निर्दलीय 7।
इसलिए बोर्ड बनाने के लिए भाजपा को निर्दलीयों की जरूरत नहीं है।
लेकिन चेयरमैन की कुर्सी के लिए भाजपा के अंदर ही कई नामों की चर्चा शुरू होना स्वाभाविक है।
किसे पार्टी आगे करती है?
किस नाम पर सभी पार्षद सहमत होते हैं?
किसके पास संगठन का भरोसा है?
और किस चेहरे को शहर के राजनीतिक समीकरण के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है?
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में मिलेंगे।
सुमेरपुर की राजनीति में अब असली सस्पेंस
चुनाव से पहले मुकाबला था—
भाजपा बनाम कांग्रेस बनाम निर्दलीय।
चुनाव के बाद तस्वीर हुई—
भाजपा 19 | कांग्रेस 9 | निर्दलीय 7
अब मुकाबला बदल गया है।
अब सवाल यह नहीं है कि बोर्ड किसका बनेगा?
वह तस्वीर काफी हद तक साफ है।
अब असली सवाल है—
“भाजपा के 19 पार्षदों में से सुमेरपुर की चेयरमैन की कुर्सी किसके नाम होगी?”
चत्रभुज शर्मा?
विनोद पारख?
भावना?
गणपत सिंह?
वीणा देवड़ा?
नटवर रामीणा?
रमेश रखेशा?
या फिर इन चर्चित नामों के बीच से निकलकर कोई नया नाम बाजी मार लेगा? सुमेरपुर में बोर्ड का गणित साफ हो चुका है, लेकिन चेयरमैन की कुर्सी का सस्पेंस अभी बाकी है।




