नई दिल्ली। नीट पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में जारी छात्र आंदोलन के बीच दिल्ली में राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। एक ओर दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कथित दुष्प्रचार फैलाने वाले पाकिस्तान से संचालित 480 सोशल मीडिया हैंडल की पहचान कर उन्हें ब्लॉक किए जाने का दावा किया है, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार ने जंतर-मंतर क्षेत्र में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर अस्थायी रोक की अवधि बढ़ा दी है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों में त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की घोषणा की है, जिस पर CJP ने अपनी प्रतिक्रिया भी दी है।
480 सोशल मीडिया हैंडल ब्लॉक करने का दावा
दिल्ली पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान पाकिस्तान से संचालित 480 सोशल मीडिया हैंडल की पहचान की गई, जो कथित रूप से समन्वित तरीके से फर्जी खबरें और भ्रामक सामग्री प्रसारित कर रहे थे। पुलिस ने छात्रों और युवाओं से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से जानकारी प्राप्त करें और किसी भी संदिग्ध या भड़काऊ पोस्ट को सत्यापन के बिना साझा न करें।
हालांकि, पुलिस के इस दावे को लेकर राजनीतिक और सोशल मीडिया पर बहस भी शुरू हो गई है। फिलहाल इन हैंडल्स की विस्तृत सार्वजनिक सूची या तकनीकी जांच रिपोर्ट जारी नहीं की गई है। ऐसे में इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
जंतर-मंतर क्षेत्र में इंटरनेट सेवा निलंबित
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दूरसंचार अधिनियम, 2023 और दूरसंचार (सेवाओं का अस्थायी निलंबन) नियम, 2024 के तहत जंतर-मंतर के लगभग 1.5 किलोमीटर क्षेत्र में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं के निलंबन की अवधि बढ़ा दी है। मंत्रालय के अनुसार यह कदम जन सुरक्षा बनाए रखने और किसी भी संभावित सार्वजनिक आपात स्थिति को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। 17 जुलाई से अब तक इस क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने के लिए कई आदेश जारी किए जा चुके हैं।
पेपर लीक मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा
लगातार जारी छात्र आंदोलनों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों में शामिल आरोपियों को शीघ्र और कठोर दंड दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का निर्णय घोषित किया। सरकार का कहना है कि इससे ऐसे मामलों की सुनवाई तेजी से पूरी हो सकेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित होगी।
CJP ने कहा—जवाबदेही पर अब भी चुप्पी
प्रधानमंत्री की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए CJP के नेता आशुतोष रांका ने फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले का स्वागत किया, लेकिन कहा कि यह घोषणा लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलनों के बाद आई है। उनका कहना है कि सरकार ने बार-बार होने वाले पेपर लीक के मूल कारणों और जवाबदेही तय करने जैसे अहम सवालों पर अभी भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया है।
सियासी बहस जारी
छात्र आंदोलन, इंटरनेट प्रतिबंध, सोशल मीडिया हैंडल ब्लॉक करने के दावे और फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा के बाद पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक तरफ सरकार इसे कानून-व्यवस्था और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए आवश्यक कदम बता रही है, जबकि दूसरी ओर आंदोलनकारी संगठन इसे छात्रों की मूल मांगों से ध्यान हटाने वाला कदम बता रहे हैं।

